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मोदी लहर में आई कमी, अपनी सभा में 40 हज़ार लोग भी नहीं जुटा पाए प्रधानमंत्री

6 अक्टूबर को इंदौर में राजबाड़ा पर अमित शाह के रोड शो में मुश्किल से सिर्फ 4 या 5 हज़ार लोग ही जुट पाए थे.

भारत में प्रधानमंत्रियों के चुनावी सभाओं में एक-डेढ़ लाख लोगों के शामिल होने का इतिहास रहा है. राजीव गाँधी, इंदिरा गाँधी, अटल बिहारी बाजपेयी और यहाँ तक कि वर्त्तमान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की पहले की चुनावी सभाओं में एक लाख के ऊपर लोग शामिल हुए हैं. लेकिन इस बार चुनावी मौसम में भाजपा को आम जनता को लुभाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. 18 नवम्बर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक सभा में भाजपा ने काफी ज़्यादा संख्या में लोगों को जुटा लेने की उम्मीद की थी लेकिन वहां 40 हज़ार से भी कम लोग पहुंचे.

दैनिक भास्कर की एक ख़बर के मुताबिक़ प्रधानमंत्री मोदी की इस सभा से लोगों को जोड़ने के लिए 17 प्रत्याशियों और नगर ज़िलाध्यक्षों को भीड़ जुटाने के लिए कहा गया था और सभा के दिन दोपहर 12 बजे ही जनसंपर्क बंद कर देने का फैसला किया गया था. इसके अलावा सभी 17 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के सभी पदाधिकारी, पार्षद, मोर्चा प्रकोष्ठ की टीम भी भीड़ जुटाने में लगी थी. इसके अलावा कार्यकर्ताओं को लाने ले जाने के लिए बसों की व्यवस्था भी की गई थी. इन सारी तैयारियों के बावजूद 40 हज़ार से भी कम लोग ही जुट पाए.

इसी तरह 6 अक्टूबर को इंदौर में राजबाड़ा पर अमित शाह के रोड शो में मुश्किल से सिर्फ 4 या 5 हज़ार लोग ही जुट पाए थे. कुछ ऐसा ही हाल प्रत्याशियों के जनसंपर्क का भी है. स्थिति ऐसी है कि जनसंपर्क के दौरान कहीं 10 या 20 या फिर ज़्यादा से ज़्यादा 100 या 200 लोग ही दिख रहे हैं.

इस मामले में कांग्रेस की भी हालत ख़राब नज़र आ रही है. लेकिन मोदी जी पिछले आम चुनावों के दौरान बहुत ताक़तवर लग रहे थे. जिस तरह से मोदी को जनता का बेहिसाब समर्थन मिलने की बात का प्रचलन किया गया है, ऐसे में इस बार भाजपा और मोदी, दोनों की लहर का प्रभाव कुछ फीका पड़ता दिखाई दे रहा है.

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