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व्यापमं घोटाले के मुख्य आरोपी के डायरी में दर्ज़ है सौदे का हिसाब-किताब, ‘वीआईपी’ व ‘मामाजी’ जैसे शब्दों का किया गया है इस्तेमाल

एमपी पीएससी के छह पदों के लिए 96 लाख का सौदा

डिप्टी कलेक्टर के लिए 20 लाख रुपए और सीटीओ के लिए 15 लाख। 10 लाख एडवांस और हर सौदे पर 25 हज़ार रुपए नॉन रिफंडेबल। ये सारे सौदे का हिसाब-किताब व्यापमं घोटाले के मुख्य आरोपी डॉ. जगदीश सागर के डायरी में दर्ज़ है। इस डायरी को जांच एजेंसियों ने ज़ब्त कर लिया है, लेकिन दैनिक भास्कर के हाथ में इसके कुछ पन्ने आने पर मामला प्रकाश में आ गया।

दैनिक भास्कर के अनुसार व्यापमं घोटाले के मुख्य आरोपी डॉ. जगदीश सागर ने एमपी पीएससी के माध्यम से डिप्टी कलेक्टर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ), वाणिज्यिक कर अधिकारी (सीटीआई) और आबकारी निरीक्षक के भी सौदे किए थे। उसके पास से मिले डायरी से यह खुलासा हुआ है कि उसने छह सौदे 95 लाख रुपए में किए।

भास्कर के अनुसार डायरी में आवेदक, उसके पिता के नाम, पता, शहर और मोबाइल नंबर भी लिखा है। आवेदक लड़का है या लड़की, वह किस कैटेगरी से है, यह भी दर्ज़ है। इसी हिसाब से डील की राशि तय की जाती थी। इसके साथ ही सौदों में कन्फर्म जैसे शब्द का भी इस्तेमाल किया गया है। कुछ सौदों के बारे में डायरी में ‘वीआईपी’ और ‘मामाजी’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए गए हैं। अब इन शब्दों का इस्तेमाल किसी करीबी के लिए किया गया है या किसी बड़े पद पर बैठे व्यक्ति के लिए ये आगे जांच से ही पता चल पाएगा।

इस डायरी में मिले नामों के आधार पर ही एसटीएफ ने जांच कर पीएमटी व प्री-पीजी में प्रवेश लेने वाले छात्रों व उनके परिजनों से पूछताछ की थी। इसमें पीएमटी के सौदे करने की पुष्टि हुई थी। डायरी सौदे के सबूत के रूप मज़बूत कड़ी साबित हुई।

गौरतलब है कि पीएमटी घोटाले में डॉ. सागर का नाम आने पर एसटीएफ ने कई जगहों पर छापामारी और पूछताछ भी की थी। इसी दौरान सागर के घर से यह डायरी मिली, जिसके 70 पन्नों में पीएमटी, व्यापमं के ड्रग इंस्पेकटर, पुलिस भर्ती के साथ ही पीएससी के सौदे का जिक्र है।

बता दें कि पांच साल पहले भी पीएससी में सौदे के संकेत मिले थे। दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 2013 में ही चार आरोपियों को पकड़ा था, जो अलग-अलग राज्यों की परीक्षाओं में पास कराने का सौदा करते थे। उन्होंने एमपी पीसीएस में भी डील की बात स्वीकारी थी। लेकिन इस मामले की विस्तृत जांच नहीं हो पाई थी।

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