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CSE की रिपोर्ट का खुलासाः नोटबंदी के बाद 2 सालों में बेरोज़गार हुए 50 लाख से अधिक लोग

रिपोर्ट के अनुसार नौकरी खोने वाले 50 लाख पुरुषों में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के कम पढ़े-लिखे पुरुषों की संख्या अधिक है.

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नोटबंदी की घोषणा के बाद 2 सालों के भीतर 50 लाख लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है. एक रिपोर्ट के अनुसार नौकरियां गवाने वालों में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले पुरुषों की संख्या सबसे ज्यादा है.

एनडीटीवी की ख़बर के अनुसार बीते मंगलवार को बेंगलुरू में स्थित अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ सस्टेनेबल एम्पलॉयमेंट (सीएसई) ने ‘state of working India 2019’ नामक  रिपोर्ट में कहा, “साल 2016 से 2018 के बीच तकरीबन 50 लाख पुरुषों को अपनी नौकरियां खो दी. इसका सबसे ज्यादा असर असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों पर पड़ा है.”

सीएसई के अध्यक्ष और रिपोर्ट के लेखक प्रोफेसर अमित बसोले का कहना है,  “इस रिपोर्ट में कुल आंकड़े हैं. भले ही कई और नौकरियों में इज़ाफा हुआ हो लेकिन यह बिल्कुल तय है कि 50 लाख रोज़गार कम हुए हैं.”

उन्होंने बताया कि डेटा के अनुसार, “रोज़गार में गिरावट नोटबंदी के आसपास (सितंबर और दिसंबर 2016) आई है.”

रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी की घोषणा के बाद रोज़गार में कमीं आनी शुरू हुई. लेकिन, रिपोर्ट में साफ तौर पर बेरोज़गारी और नोटबंदी में संबंध नहीं दिखाया गया है.

रिपोर्ट के अनुसार नौकरी खोने वाले 50 लाख पुरुषों में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के कम पढ़े-लिखे पुरूषों की संख्या अधिक है.

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बेरोज़गार ज्यादातर उच्च शिक्षित और युवा हैं. शहरी कामकाजी महिलाओं की संख्या में 10 फीसदी ही ग्रेजुएट्स हैं, जबकि 34 फीसदी बेरोज़गार हैं. वहीं, शहरी पुरूषों में 13.5 फीसदी ग्रेजुएट्स हैं. लेकिन, 60 फीसदी बेरोज़गार हैं. बेरोज़गारों में 20 से 24 साल के युवाओं की संख्या सबसे अधिक है. सामान्य तौर पर पुरूषों से ज्यादा महिलाओं में बेरोज़गारी दर बहुत ज्यादा है.

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