देश की सांप्रदायिक शांति बिगाड़ने के लिए नहीं हुई है जवानों की कुर्बानी: CRPF
नफ़रत और समाज में अशांति फैलाने वाले पोस्ट की असलियत को सामने लाने के लिए दिल्ली में सीआरपीएफ के 12 से 15 जवानों की एक टीम बनाई गई है.
पुलवामा आतंकी हमले में सीआरपीएफ़ जवानों की मौत के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे सांप्रदायिक रूप देने में लगे हैं. फ़ेक न्यूज़ और फ़र्ज़ी फ़ोटो के जरिए भ्रामक सूचनाएं फैलाई जा रही हैं. इसे लेकर सीआरपीएफ ने एक टीम का गठन किया है, जो ऐसे सोशल मीडिया पोस्ट पर नज़र रख रही है और इसे फ़ैलाने वाले पर कार्रवाई करेगी.
सीआरपीएफ़ के डीआईजी एम. दिनाकरन का कहना है कि हमारे जवानों ने इसलिए बलिदान नहीं दिया कि उनका इस्तेमाल सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए किया जाए.
बूमलाइव के मुताबिक सीआरपीएफ के डीआईजी और मुख्य प्रवक्ता एम दिनाकरन का कहना है, “पुलवामा हमले के बाद कई तरह के फ़ोटो और विडियोज़ वायरल हो रहे हैं. इसमें कुछ तो सीधे तौर पर हिंसात्मक हैं. यह विचलित कर देने वाली बात है. कुछ पोस्ट में तो हमारे जवानों का सीधे तौर पर अपमान किया जा रहा है.
उन्होंने अपनी जान की कुर्बानी इसलिए नहीं दी कि उनकी शहादत का इस्तेमाल सांप्रदायिक नफ़रत फ़ैलाने के लिए किया जाए. जब ये सब चीज़ें फैलनी लगी, तो हम सबने सोचा कि इसे रोकने के लिए कुछ कदम उठाए जाने चाहिए.”
नफ़रत और समाज में अशांति फैलाने वाले पोस्ट की असलियत को सामने लाने के लिए दिल्ली में सीआरपीएफ के 12 से 15 जवानों की एक टीम बनाई गई है. ये जवान इन तथ्यों की जांच कर रहे हैं.
दिनाकरन ने कहा है, “मैंने बुलधाना के किसी का एक पोस्ट देखा, जिसमें एक बाल्टी में शरीर के कई अंगाों को रखा गया था. इसमें दावा किया गया था कि यह एक सीआरपीएफ़ जवानों के शरीर के अंश हैं और इसे एक जवान के परिवार को सौंपा गया है. यह फ़ोटो काफ़ी डरावना था और मुझे अंदर तक इसने झकझोर दिया था.”
बूमलाइव के मुताबिक ऐसे फ़ोटोंज़ और पोस्ट के सत्यापन के लिए अन्य क्षेत्रीय केंद्रों का भी गठन किया गया है. फ़ेक न्यूज़ को हटाने और सही जानकारी सामने लाने के लिए बड़ी टीम का गठन किया गया है.
सीआरपीएफ़ ने अपने तीन लाख से ज्यादा जवानों और उनके परिवार वालों की सहायता से सही जानकारी लाने का प्रयास भी कर रहा है. इसके साथ ही फ़ेक न्यूज़ के ख़िलाफ़ सीआरपीएफ ने एक चेतावनी भी जारी किया है.