“नागरिकता संशोधन विधेयक ‘अनेकता में एकता’ विचार पर हमला है” दिल्ली में माकपा का विरोध प्रदर्शन
बिल को सीधे तौर पर देश के ‘अनेकता में एकता’ के विचार पर हमला ठहराते हुए केंद्र सरकार से इस प्रस्ताव पर आगे ना बढ़ने और इसे तुरंत वापिस लेने की अपील की गई
नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में आज दिल्ली में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने अपना प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन किया. पोलित ब्यूरो के सदस्य कॉमरेड तपन सेन और माकपा के दिल्ली सचिव कॉमरेड के.एम. तिवारी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का संविधान देश के सभी नागरिकों को समान नज़र से देखता है. इसमे जाति, संस्कृति, रहन-सहन, धर्म और लिंग के आधार पर बिना किसी से भेदभाव किए हर किसी को समानता की गारंटी दी गई है. संविधान में धर्म के आधार पर नागरिकता तय नहीं होती है.
उन्होंने इस बिल को सीधे तौर पर देश के ‘अनेकता में एकता’ के विचार पर हमला ठहराया. पूर्वोत्तर को देश का एक बहुत ही ज़्यादा विविधताओं से भरा क्षेत्र बताते हुए कहा कि भाषा, धर्म, रीति-रिवाज़ और रहन-सहन के मामले में यहां के लोग बहुत संवेदनशील रहते हैं. यहां के बाशिंदों में अपनी अलग पहचान को बचाए रखने को लेकर हमेशा से असुरक्षा की भावना रही है. हाल के दिनों में इस क्षेत्र में अच्छी शांति कायम हो गई थी लेकिन नागरिकता संशोधन बिल की वजह से यहां फिर से अशांति का माहौल पैदा हो रहा है.
असम और पूर्वोत्तर के कई राज्यों के लोग बड़े पैमाने पर इस बिल का विरोध करते हुए सड़कों पर उतर आये हैं.लोगों की बढ़ती असुरक्षा और बैचेनी की भावना को देखते हुए इस प्रस्तावित संवैधानिक विधेयक को वापिस लेना बहुत ज़रूरी है.
माकपा ने केंद्र सरकार से इस प्रस्ताव पर आगे ना बढ़ने और इसे तुरंत वापिस लेने की अपील की.