प्रो. अपूर्वानंद ने जताई चिंता- अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के हाथों में चला गया है देश का संविधान, देखें VIDEO
प्रो. अपूर्वानंद ने कहा कि हमें यह जरूर सोचना चाहिए कि क्या हमने अपने मुल्क को अपराधियों के हवाले कर दिया है.
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर और चिंतक प्रो. अपूर्वानंद ने देश में भीड़ की संस्कृति को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने कहा है कि 1992 में बाबरी मसज़िद के विध्वंस के बाद देश एक गंभीर परिस्थिति से गुजर रहा है. उन्होंने कहा कि बाबरी विध्वंस से 26 साल बाद आज बुलंदशहर में भीड़ ने गौहत्या को लेकर एक पुलिस इंस्पेक्टर की जान ले ली. हमें यह विचार करने का समय आ गया है कि क्या हमारे देश का संविधान अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के हाथों में चला गया है.
कारवां-ए-मोहब्बत द्वारा जारी एक विडियो में प्रो. अपूर्वानंद ने कहा, “कुछ लोग सलाह देते हैं कि बाबरी मसज़िद की जगह पर राम मंदिर बनाया जाए या यूनिवर्सिटी बना दिया जाए, इस तरह का कोई भी समझौता सड़ा हुआ समझौता होगा.” उन्होंने कहा कि बाबरी मसज़िद को भूल जाने का मतलब है इंसाफ़ को भूल जाना. उन्होंने कहा है कि चूंकि हमने बाबरी मसज़िद के मामले में इंसाफ़ नहीं किया, इसलिए हम ऐसे मुकाम पर पहुंच गए जहां दिल्ली से कुछ दूर बुलंदशहर में भीड़ ने पुलिस वाले को मार डाला.
प्रो. अपूर्वानंद ने कहा कि बाबरी विध्वंस के 26 साल बीतने के बाद आज हमें यह विचार करने की जरूरत है कि बाबरी मसज़िद के गिराए जाने और बुलंदशहर में पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या के बीच क्या कोई संबंध है. उन्होंने कहा कि हमें यह सोचना जरूरी हो गया है कि क्या हमने अपने मुल्क को अपराधियों के हवाले कर दिया है.
उन्होंने कहा कि हमें विचार करने की जरूरत है कि क्या इस मुल्क में संविधान उन लोगों के हाथों में चला गया है जो अपराधी मनोवृत्ति के हैं. उन्होंने कहा कि हमें विचार करने की जरूरत है कि हम अपने देश को अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के हाथों में बने रहने देना चाहते हैं या इस मुल्क को वापस अपने हाथों में लेना चाहते हैं.