377 पर फैसला उदारवादी और सहिष्णु समाज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम: कांग्रेस
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 158 साल पुरानी आईपीसी की धारा 377 को निरस्त कर दिया जिसमें परस्पर सहमति से अप्राकृतिक यौन संबंध अपराध था।
कांग्रेस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 पर गुरुवार को आए उच्चतम न्यायालय के फैसले को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया और कहा कि यह ‘उदारवादी एवं सहिष्णु समाज’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, ‘‘धारा 377 पर उच्चतम न्यायालय का फैसला ऐतिहासिक है। यह पुराना औपनिवेशिक कानून आज के आधुनिक समय में अप्रसांगिक था। मौलिक अधिकारों को बहाल करते हुए और यौन रुझान आधारित भेदभाव को नकारते हुए यह कानून खत्म हुआ।’’
Supreme Court verdict on #Section377 is momentous.
An age-old colonial law, that was an anachronism in today’s modern times, ends restoring the fundamental rights & negating discrimination based on sexual orientation. It’s an imp step forward towards a liberal, tolerant society.
— Randeep Singh Surjewala (@rssurjewala) September 6, 2018
उन्होंने कहा, ‘‘ यह उदारवादी, सहिष्णु समाज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।’’
उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने गुरूवार को एकमत से 158 साल पुरानी भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के उस हिस्से को निरस्त कर दिया जिसके तहत परस्पर सहमति से अप्राकृतिक यौन संबंध अपराध था।
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने अप्राकृतिक यौन संबंधों को अपराध के दायरे में रखने वाली धारा 377 के हिस्से को तर्कहीन, सरासर मनमाना और बचाव नहीं किये जाने वाला करार दिया।