‘ग्रामीण इलाक़े बर्बाद, साहेब आबाद’: मनरेगा और न्याय योजना का अपमान करने को लेकर कांग्रेस ने PM मोदी पर कसा तंज
कांग्रेस का आरोप है कि देश का 40 फीसदी हिस्सा सूखे की स्थिति से गुजर रहा है, जिसमें से 16 से 17 फीसदी सबसे ज़्यादा ख़राब हैं.
आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र राजनीतिक दलों का चुनावी अभियान जोरों पर है. इसी कड़ी में कांग्रेस पार्टी ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर मोदी सरकार को ग़रीब विरोधी बताया है तथा ‘न्याय’ योजना का मजाक उड़ाने को लेकर प्रधानमंत्री मोदी तथा भाजपा पर निशाना साधा है.
कांग्रेस द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुख्य बिंदु निम्न प्रकार से है:
- कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि मोदी सरकार ने ग़रीबों पर वार किया है. यह ग़रीब विरोधी सरकार है. केन्द्र सरकार ने ‘न्याय’ का माखौल उड़ाया, मनरेगा को कमजोर करते हुए मनरेगा वेतन में सिर्फ 2.16 फीसदी की बढ़ोतरी की. यह बढ़ोतरी 14 सालों में सबसे कम है.
- कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा है, ‘ग्रामीण इलाक़े बर्बाद, साहेब आबाद !’
- कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि पीएम मोदी और उनके मंत्री कांग्रेस की NYAY योजना का मखौल उड़ा रहे हैं. लेकिन महात्मा गांधी नरेगा की मजदूरी के निधियों को इन्होंने खत्म कर दिया है. नरेंद्र मोदी सरकार की धनी और ग़रीब विरोधी नीतियों ने पिछले 5 सालों में बड़े पैमाने पर गांवों में संकट पैदा किए हैं. मजदूरों को उनकी मजदूरी नहीं दी गई है
- कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मनरेगा के तहत मोदी सरकार ने 2019-20 के लिए औसत वार्षिक वेतन वृद्धि के रूप में 2.16% की मामूली बढ़ोतरी की है, जो अब तक की तुलना में सबसे कम है.
- मोदी सरकार ने कर्नाटक, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में मनरेगा के तहत वेतन बढ़ोतरी के लिए कोई धनराशि जारी नहीं की है.
- भाजपा शासित प्रदेश बिहार और झारखंड में मनरेगा मजदूरों की मजदूरी सबसे कम 171 रूपये प्रतिदिन है.
- कांग्रेस का आरोप है कि ग्रामीण मजदूरों पर सीधे हमला करते हुए मोदी सरकार ने विशेषज्ञ महेंन्द्र देव पैनल की रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया है, जिसमें नरेगा मजदूरी को न्यूनतम राज्य कृषि मजदूरी के बराबर लाने की सिफ़ारिश की थी और इसे वार्षिक पुनरीक्षण के लिए उपभोक्ता संरक्षण मूल्य (ग्रामीण) के साथ सूचीबद्ध किया गया था.
किसानों को मोदी सरकार ने नहीं दी कोई राहत
- इसके साथ ही कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि देश का 40 फीसदी हिस्सा सूखे की स्थिति से गुजर रहा है, जिसमें से 16 से 17 फीसदी सबसे ज़्यादा ख़राब हैं. 2018 के दक्षिण-पश्चिम और पूर्वोत्तर मानसून ने कर्नाटक से गुजरात और महाराष्ट्र, और तमिलनाडु से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के साथ पूरे देश में सूखे की स्थिति पैदा कर दी है, लेकिन मोदी सरकार ने भयंकर सूखे से जूझ रहे किसानों को कोई राहत नहीं दी.
बता दें कि लोकसभा चुनाव में दो हफ़्ते से भी कम समय बचा हुआ है. ऐसे में सभी पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और एनडीए को विपक्षी दलों से कड़ी टक्कर मिल रही है. कांग्रेस पार्टी ने न्यूनतम आमदनी योजना “न्याय” की घोषणा करके चुनाव को दिलचस्प मोड़ पर ला दिया है.