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छत्तीसगढ़ : “टाटा” के हाथ से वापस ली जा रही आदिवासी-किसानों की जमीन, देश के इतिहास में पहली बार अन्नदाताओं को मिली ऐसी राहत

राहुल गांधी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में किसानों की जमीन वापस लौटाने का वादा किया था, उनकी सरकार ने इस दिशा में कार्यवाई शुरू कर दी है.

छत्तीसगढ़ में किसानों की कर्जमाफ़ी के बाद कांग्रेस सरकार ने अपना एक और बड़ा वादा पूरा किया है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उद्योगपतियों के हाथों से बस्तर के किसानों की जमीन लेकर किसानों को सौंपने का फ़ैसला किया है. देश के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि उद्योगपतियों के हाथों से किसानों की जमीन लेकर वापस की जा रही है. राहुल गांधी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में यह घोषणा की थी.

दरअसल, 2005 में भाजपा सरकार ने 19,500 करोड़ रुपए की लागत से लगने वाले स्टील प्लांट के लिए जमीन देने के प्रस्ताव पर दस्तख़्त किए थे. इसके बाद बस्तर जिले के कई गांवों में जमीन अधिग्रहित की गई. टाटा ने कुल 1764 हेक्टेयर जमीन अधिगृहित की थी.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक 2008 में भाजपा सरकार ने यह जमीन टाटा को सौंप दी, लेकिन इसके बाद यहां कोई उद्योग नहीं लग सका. तब से लगातार किसान मांग कर रहे थे कि उनकी जमीन को वापस दिलाई जाए. इसके बाद कई बार किसानों ने आंदोलन भी किया.

इसके साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में कहा था कि ऐसी जमीन जहां अधिग्रहण के पांच साल के भीतर कोई उद्योग नहीं लग सका है, किसानों को वापस दिलाई जाएगी. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस दिशा में भी कार्रवाई शुरू कर दी है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कहा है कि एक प्रस्ताव तैयार किया जाए जिसे जल्द ही पास कर किसानों की जमीन लौटाई जाएगी.

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