कन्हैया-उमर के ख़िलाफ़ दायर चार्जशीट पर एक सुर में बोले JNU के छात्र- 2019 के चुनाव से प्रेरित है आरोप पत्र
छात्रों का कहना है कि सरकार जनता के मुद्दों पर अपनी विफलता को छिपाना चाहती है.
कथित देशविरोधी नारेबाज़ी मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा जेएनयू के छात्रों के ख़िलाफ़ दायर चार्जशीट को विश्वविद्यालय के छात्रों ने राजनीति से प्रेरित बताया है.
द वायर की ख़बर के अनुसार छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने कहा है कि आरोप पत्र 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले दायर किया गया, यह दर्शाता है कि यह राजनीति से प्रेरित है, “लेकिन हम खुश हैं कि चार्जशीट अंत में दायर की गई है, हम अभी स्पीडी ट्रायल की मांग करते हैं, ताकि सच्चाई सामने आए. मुझे अपने देश की न्यायपालिका पर भरोसा है.”
वहीं एक संयुक्त बयान में उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य ने भी चार्जशीट के समय पर सवाल उठाते हुए कहा है, “एफ़आईआर के 90 दिन के भीतर चार्जशीट आदर्श रूप से दर्ज की जानी चाहिए न कि अगले चुनाव से 90 दिन पहले.” उन्होंने कहा कि सरकार ने चुनाव से ठीक पहले जनता के मुद्दे पर अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए यह चार्जशीट दायर की है.
उधर ट्विटर पर उमर खालिद ने कहा कि वे अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार हैं. “लेकिन क्या नरेंद्र मोदी राफ़ेल घोटाले पर जेपीसी का सामना करने के लिए तैयार हैं, या कम से कम एक बार प्रेस कॉन्फ्रेंस का सामना करेंगे?”
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार विश्वविद्यालय की छात्र नेत्री शेहला राशिद ने इस मामले को “संगीन” बताया क्योंकि वह घटना के दिन कैंपस में मौजूद नहीं थी. उन्होंने कहा, “यह एक संगीन आरोपपत्र है, जिसे राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए लोकसभा चुनाव से पहले दायर किया गया है.”
सीपीआई के राज्यसभा सांसद डी. राजा की बेटी और छात्रनेता अपराजिता राजा ने आरोप पत्र को “छात्रों की सक्रियता” पर हमला बताया. उन्होंने कहा कि सच यह है कि एक चार्जशीट को एक साथ रखने के लिए उन्हें तीन साल लग गए हैं, यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि इसका कोई आधार नहीं है. इसका मकसद बस सत्ता के खिलाफ बोलने वाले छात्रों की आवाज़ को चुप कराना है, जेएनयू कैंपस में अब तक कोई भी देशद्रोही गतिविधि नहीं हुई है.
बता दें कि 9 फरवरी 2016 को जेएनयू परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान छात्रों द्वारा कथित रूप से भारत विरोधी नारे लगने का आरोप है.