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क्या उद्योगपति को बचाने के लिए मोदी जी के मंत्री ने लिया करोड़ों रुपए का घूस? सीबीआई अधिकारी का बड़ा आरोप

आरोप है कि करोड़ों रुपए लेकर मंत्री हरिभाई चौधरी ने मोईन कुरैशी मामले में हस्तक्षेप किया.

सीबीआई को लेकर चल रहे विवाद में एक और कड़ी जुड़ चुकी है. सीबीआई के डीआईजी मनीष कुमार सिन्हा ने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की जिसमें उन्होंने कोयला एवं खदान राज्यमंत्री हरिभाई पार्थीभाई चौधरी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, केंद्रीय कानून सचिव सुरेश चंद्रा और मंत्रिमंडल सचिव पी के सिन्हा के ख़िलाफ़ गंभीर आरोप लगाए हैं.

मनीष कुमार सिन्हा सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ लगे रिश्वत के आरोपों की जांच कर रहे थे. प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा आलोक वर्मा के बतौर सीबीआई निदेशक सभी शक्तियों को उनसे वापस लेने के निर्देश जारी होने के बाद ही तीन सदस्यों के इस दल के सभी अफसरों का तबादला सीबीआई मुख्यालय से बाहर कर दिया गया.

सिन्हा ने अपनी याचिका में सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं :

कोयला एवं खदान के केंद्रीय राज्य मंत्री हरिभाई पार्थीभाई चौधरी के ख़िलाफ़ रिश्वत लेने का आरोप

सिन्हा ने अपनी याचिका में बताया कि जब उन्होंने सतीश सना से राकेश अस्थाना के रिश्वतखोरी के मामले में बात की थी तब सना ने स्वीकार किया था कि मोदी सरकार के मंत्री हरिभाई पार्थीभाई चौधरी को उसने कई करोड़ रुपए रिश्वत में दिए थे. यह पैसा दिसंबर 2017 से 10 महीनों की अवधि में दिया गया था.

इन करोड़ों रुपयों की रिश्वत के बदले में हरिभाई चौधरी ने सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों को लेकर कार्मिक, लोक शिक़ायत एवं पेंशन मंत्री (एमओएस) के ज़रिए हस्तक्षेप किया. ऐसा माना जाता है कि सीबीआई के निदेशक उनके पास ही रिपोर्ट करते थे. सना ने सिन्हा को बताया कि उन्होंने ‘डर और मिल रही धमकियों’ की वजह से उन्हें रिश्वत दी.

सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक़ एमके सिन्हा का यह दावा है कि दूसरे केंद्रीय एजेंसी के साथ कुछ कॉल इंटरसेप्ट किये गए थे, जिसमें के मेडचल, हैदराबाद के विधायक लक्ष्मण रेड्डी और सना के बीच 1 या दो करोड़ की राशि भेजने को लेकर बातचीत हुई है.

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल पर मामले पर पर्दा डालने का आरोप

अपनी याचिका में सिन्हा ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल पर पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश करने का आरोप लगाया है. उन्होंने याचिका में बताया कि सना के बयानों को रिकॉर्ड कर जांच अधिकारी को पेश किया गया. सीबीआई के विशेष सेल के इनपुट के आधार पर 20 अक्टूबर, 2018 को “मोईन कुरैशी मामले की जांच कर रहे सीबीआई के डीएसपी देवेन्द्र कुमार के निवास और कार्यालय में छानबीन की गई.” लेकिन सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को एनएसए डोभाल ने फ़ोन करके इस छानबीन को रोक देने के लिए कहा.

केंद्रीय कानून सचिव सुरेश चन्द्र एवं मंत्रिमंडल सचिव पीके सिन्हा ने पूर्ण सुरक्षा की पेशकश की

एमके सिन्हा ने यह दावा किया है कि उन्हें मालूम था कि जब अलोक वर्मा के ख़िलाफ़ सीवीसी में कार्रवाई चल रही थी, तब आंध्र प्रदेश की आईएएस अफसर रेखा रानी ने कई बार सना से यह कहकर संपर्क किया कि केंद्रीय सचिव सुरेश चंद्रा उनसे बात करना चाहते हैं. उस वक़्त सुरेश चंद्रा नीरव मोदी के मामले को लेकर लन्दन में होने का दावा करते हैं. उन्होंने सना से व्हाट्सएप पर 8 नवम्बर को एक सन्देश में यह कहा कि केंद्रीय मंत्रालय की ओर से मंत्रिमंडल सचिव पीके सिन्हा उन्हें पूर्ण सुरक्षा देंगे. उन्होंने यह भी कहा कि मंगलवार यानी 13 नवम्बर को कुछ बड़े बदलाव होने जा रहे हैं और उन्हें (सना) को उनसे (सुरेश चंद्रा से) 14 नवम्बर को मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि आईबी भी उन्हें ट्रैक नहीं कर पा रही है और उन्होंने चामुंडेश्वरनाथ के ज़रिये भी ये सूचना पहुंचाने की कोशिश की थी जिनसे वे लन्दन में अपने होटल में मिले थे. इस कॉल को सना ने रात में दुबारा फ़ोन करने का वादा कर काटा था.

ज्ञात हो कि सिन्हा भारतीय पुलिस सेवा में वर्ष 2000 में शामिल हुए थे. वे आंध्र प्रदेश कैडर से हैं और पांच साल पहले सीबीआई में शामिल हुए थे.

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