बीजेपी सांसदों के बड़े बोल, 2019 में चुनाव जीते तो पूरे देश में लागू होगा एनआरसी
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘यदि ज़रूरत हुई तो एनआरसी को राज्य में भी लागू करेंगे’
एनआरसी को लेकर राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही है। इसको लेकर भाजपा नेताओं की लगातार बयानबाज़ियां सामने आ रही हैं। सोमवार को भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद ओम माथुर ने कहा कि यदि भाजपा 2019 में लोकसभा चुनाव जीती तो पूरे देश में एनआरसी लागू किया जाएगा। इससे पहले लोकसभा में भाजपा सदस्य निशिकांत दुबे ने एनआरसी को पूरे देश में लागू करने की मांग की थी। हालांकि इस बयान का विपक्षी दलों ने ज़ोरदार विरोध किया था।
उधर रविवार को मेरठ में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “यदि ज़रूरत हुई तो एनआरसी को राज्य में भी लागू करेंगे। देश एक भी घुसपैठिया स्वीकार नहीं करेगा।”
गौरतलब है कि ये बयान तब सामने आए हैं जब रविवार को प्रधानमंत्री ने कहा था, “मैं आश्वस्त करता हूं कि भारत के किसी भी नागरिक को देश नहीं छोड़ना पड़ेगा। एनआरसी में तय प्रक्रिया के अनुसार सभी को पर्याप्त मौके दिए जाएंगे।”
इधर द वायर की एक रिपोर्ट के अनुसार एनआरसी में दावों के लिए फॉर्म न मिलने से असम के लोग नाराज़ हैं। सात अगस्त को शुरू होने वाली कवायद अब लगभग एक सप्ताह के लिए विलंबित हो गई है।
इधर असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने दावा किया है कि एनआरसी की परिकल्पना उनकी ही थी, लेकिन भाजपा इसे सम्भालने में विफल साबित हुई है। तरुण गोगोई ने कहा, ‘भाजपा ने विदेशियों के मुद्दे पर हमेशा सांप्रदायिक आधार पर राजनीति की है और समस्या सुलझाने में उसकी दिलचस्पी नहीं है।’
तरुण गोगोई ने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशियों को बाहर नहीं करना चाहते हैं बल्कि वह और लोगों को देश में लाने में दिलचस्पी रखते हैं। भाजपा इस मुद्दे को ज़िंदा रखना चाहती है और यही उसका गठबंधन सहयोगी असम गण परिषद भी चाहता है।’
एनआरसी के मुद्दे को लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार को कहा, “हमने जब बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचानने का साहस दिखाया, तो विपक्ष ने बखेड़ा शुरू कर दिया। हम एक भी घुसपैठियों को देश में नहीं रहने देंगे।”
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले असम में एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट जारी किया गया, इसमें 40 लाख लोगों के नागरिकता पर तलवार लटक रही है। यह एक राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है जिसे लेकर सत्तारूढ़ पार्टी और विपक्ष एक-दूसरे पर निशाना साधने में लगे हैं।