भाजपा के ‘शत्रु’ आख़िर किसके बनेंगे दोस्त?
शॉटगन सिन्हा आजकल एक अलग ही कॉनिफिडेंस में दिख रहे हैं. हाल ही में एक टीवी शो में उन्होंने कहा कि मैं भाजपा नहीं छोड़ने वाला, पार्टी चाहे तो उन्हें बाहर कर सकती है.
लोकसभा चुनाव नज़दीक है. सुगबुगाहट तेज़ है. अलग-अलग राज्यों में सीट बंटवारे के साथ पार्टी नेताओं के बयानों को परखा जा रहा है. गतिविधियों के आधार पर क़यास लगाने की कोशिश की जा रही है कि ऊंट किस करवट बैठेगा.
बिहार में सभी को ख़ामोश करने वाली आवाज़ ने सियासी खलबली मचा रखी है. पटना साहिब लोकसभा सीट से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा अपनी ही पार्टी के सबसे बड़े ‘शत्रु’ बने हुए हैं. भाजपा में उनके पार्टी लाइन से दिए जा रहे अलग बयानों से ख़ासी नाराज़गी है. ऐसे क़यास लगाए जा रहे हैं कि इसबार पार्टी उनको पटना साहिब सीट से टिकट नहीं देने वाली. उधर शत्रुघ्न सिन्हा ने भी पहले ही चेतावनी दे रखी है कि उन्हें कोई पार्टी से निकालकर दिखाए. सिन्हा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वो अगला लोकसभा चुवाव पटना साहिब से ही लड़ेंगे, चाहे परिस्थितियां जो भी हों.
Patna Sahib & Patna Sahib…
I welcome any aspirant in this democratic fight. Nothing wrong!
Jai Bihar! Jai Hind!— Shatrughan Sinha (@ShatruganSinha) September 23, 2018
पार्टी में है काफ़ी नाराज़गी
साल 2013. जब बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को पार्टी के तरफ़ से प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित किया था. तब से ही शत्रुघ्न सिन्हा पार्टी के ख़िलाफ़ लगातार बोल रहे हैं. उस समय उन्होंने कहा था कि मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए आडवाणी और सुषमा स्वाराज जैसे वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की जा रही है. कैबिनेट में जगह नहीं मिलने पर शत्रुघ्न सिन्हा और भी नाराज़ हो गए. फिर वे मुखर रूप में मोदी नीतियों की आलोचना करने लगें. धीरे-धीरे उनके और पार्टी के बीच खाई बढ़ती गई.
हालांकि ज़्यादातर समय पार्टी उनको बयानों को इग्नोर करती रही है. लेकिन प्रदेश स्तर पर उनके बयानों से कई नेता बहुत नाराज़ हैं. कुछ महीने पहले राजद की इफ़्तार में सिन्हा के शामिल होने पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद ने कहा था कि शत्रुध्न के पार्टी में अब गिनती के ही दिन बचे हैं.
भाजपा के प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल भी कह चुके हैं कि सांसद सत्रुध्न सिन्हा को न पार्टी में जगह मिल रही है और न बाहर, इसलिए वो फ्रस्ट्रेशन में हैं.
कई मीडिया रिपोर्ट में इस बात के अनुमान लगाए गए हैं कि भाजपा से इसबार पटना साहिब से सुशील मोदी उम्मीदवार हो सकते हैं. टिकट न देकर पार्टी शत्रुघ्न सिन्हा की आवाज़ को ख़ामोश करने वाली है. हालांकि शत्रुघ्न सिंहा ने भी भाजपा को भी यह कहकर कड़ा संदेश दे दिया है कि वो चुनाव पटना साहिब से ही लड़ेंगे, भले परिस्थितियां जो भी हों.
भाजपा के शत्रु किसका थामेंगे दामन
अपने बयानों से ख़लबली मचाने वाले शॉटगन शत्रुघ्न सिन्हा ने कल कहा कि यदि इंदिरा गांधी ज़िंदा रहती तो वह कांग्रेस में होते. उन्होंने सीबीआई पर कांग्रेस के स्टैंड का समर्थन किया. इससे पहले वे राजद और युवा नेता तेजस्वी की काफ़ी प्रशंसा कर चुके हैं. कई बार तेजस्वी को अपना घर का बच्चा और बिहार का एकलौता चेहरा भी बता चुके हैं.
राजद की इफ़्तार में तो लालू की बेटी मीसा भारती ने कहा था कि ‘वे भाजपा के शत्रु हैं, हमारे नहीं. यदि वो तैयार हों, तो हमारी पार्टी का नेतृत्व ख़ुशी-ख़ुशी पटना साहिब से टिकट देने के लिए तैयार है.’
कई राजनीति के जानकारों का मानना है कि शत्रुघ्न अपने पास विकल्प रखे हुए हैं. इधर पटना साहिब में उनका जनाधार कम होने के बावज़ूद राजद द्वारा टिकट देने का न्यौता बीजेपी में खलबली मचा रहा है. भाजपा में कई लोगों का मानना है कि यदि शत्रुघ्न दूसरे दल में गए तो ठीक नहीं होगा.
शॉटगन का कॉन्फिडेंस हाई है
शॉटगन सिन्हा आजकल एक अलग ही कॉनिफिडेंस में दिख रहे हैं. हाल ही में एक टीवी शो में उन्होंने कहा कि मैं भाजपा नहीं छोड़ने वाला, पार्टी चाहे तो उन्हें बाहर कर सकती है. राजद के द्वारा पटना साहिब से चुनाव लड़ने का न्यौता और ख़ुद भी एक बड़े चेहरे के रूप में स्थापित होने के कारण सिन्हा को पार्टी की बहुत ज़रूरत महसूस नहीं हो रही. इसलिए वो लगातार मोदी सरकार पर हमला बोल रहे हैं. मोदी की तुलना रावण से करते दिख रहे हैं तो मोदी सरकार की हिटलर सरकार से.
इससे पहले दिल्ली से चुनाव लड़ने की आई थी ख़बर
पहले यह ख़बर आई थी कि शत्रुघ्न सिन्हा आप पार्टी के टिकट पर दिल्ली से चुनाव लड़ेंगे. उनके साथ ही भाजपा छोड़े यशवंत सिंहा की भी आप पार्टी से चुनाव लड़ने की बात सामने आ रही थी. हालांकि बाद में शत्रुघ्न सिंहा ने इन अफ़वाहों पर यह ट्वीट करके विराम लगा दिया कि वे हर हालत में पटना साहिब से ही चुनाव लड़ेंगे.
दरअसल, एक बार सिन्हा ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी की लहर की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि “अगर ‘आप’ के बारे में सवाल किए जा रहे हैं, तो इसका मतलब है ‘आप’ की ताकत दिख रही है… मुंबइया स्टाइल में कहूं तो ‘आप’ का बूमा-बूम हो रहा है… ‘आप’ की पकड़ दिखाई दे रही है.