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अपनी बेटी की लाश को ले कर एक पिता ने मोदी जी से पूछा- क्या यही है आपका बेटी बचाओ?

सांप काटने पर बच्ची के पिता ने जब उसे सीतामढ़ी अस्पताल ले जाने के लिए अस्पताल प्रशासन से एंबुलेन्स की मांग की तो उसे एंबुलेन्स नहीं मिली।

“मोदी जी ध्यान से सुनिए मेरी बात आपने बेटी बचाओ का ऐलान किया है आपने लेकिन यहां बेटी बचाओ नहीं बेटी मारो हो रहा है।” ये शब्द उस आक्रोशित पिता के हैं जिसने अपनी मासूम बच्ची को प्रशासन और सरकारी अस्पताल की लापरवाही के कारण खो दिया है।

 

ट्विटर में साझा किये जा रहे एक विडियो में सीतामढ़ी ज़िले के एक गांव में एक बच्ची को सांप ने काट लिया था। हाथ पर कपड़ा बांधकर (ताकि ज़हर शरीर में न फैले) बिना किसी साधन के जब पिता पास के मेजरगंज के अस्पताल पहुंचा तो अस्पताल में बच्ची को इंजेक्शन लगा दिया गया और सीतामढ़ी अस्पताल ले जाने के लिए कहा गया।

बच्ची के पिता ने जब उसे सीतामढ़ी अस्पताल ले जाने के लिए अस्पताल प्रशासन से एंबुलेन्स की मांग की तो उसे एंबुलेन्स नहीं मिली। मजबूर पिता ने बेटी की जान बचाने के लिए उसे टेम्पो में अस्पताल ले जाने का फ़ैसला किया लेकिन बच्ची ने आधे रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

अपनी बेटी को प्रशासन की लापरवाही से खो देने की वजह से गुस्साए पिता ने बच्ची की लाश हाथ में लेकर उस विडियो में प्रधानमंत्री मोदी और शासन-प्रशासन की इस गैर-ज़िम्मेदाराना रवैये पर अपना रोष और बेटी को खो देने का दुख ज़ाहिर किया।

गौर करने की बात यह है कि यही विडियो बीते कुछ दिनों से फेसबुक और ट्विटर पर कांग्रेस द्वारा घोषित बंद के खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा था। अब सवाल यह उठता है कि कब तक इस प्रकार साधनों के आभाव में मासूम बच्चे, गर्भवाती महिलाएं और बुजुर्ग अपनी जान गवाते रहेंगे? क्या यह प्रशासन की ज़िम्मेदारी नहीं है कि वह ज़िले के गांवों में एंबुलेन्स मुहैया करवाए? क्या सरकारें केवल जुमलेबाज़ी करने के लिए बनती हैं?

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