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बिहार: नीतीश की धमकी पर 2 लाख से ज़्यादा रसोइयों का उग्र प्रदर्शन , स्कूलों में घटी बच्चों की उपस्थिति

मिड डे मिल कर्मियों की हड़ताल की वजह से स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति में 50 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.

बिहार में मिड डे मिल कर्मियों की हड़ताल बीते एक महीने से चल रही है. इस पर राज्य सरकार ने आंदोलनरत रसोइयों का वेतन काटने और नौकरी से हटा देने की धमकी दी है. सरकार की इस धमकी के बाद यह आंदोलन और व्यापक हो गया है और सरकार के ख़िलाफ़ लगभग 2 लाख 48 हज़ार रसोइयों ने प्रदेश भर में मोर्चा खोल दिया है.

ग़ौरतलब है कि पूरे राज्य में बीते 7  जनवरी से 2.48  लाख मिड-डे मील रसोइया अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. जिसकी वजह से एक करोड़ से अधिक स्कूली बच्चे, जो ज्यादातर गरीब परिवारों से आते हैं, पौष्टिक भोजन से वंचित हो रहे हैं. भोजन न मिलने की वजह से स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति कम हो रही है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार में 71,000 प्राथमिक और मध्य विद्यालय हैं, जिनमें 1.2 करोड़ बच्चों को मध्याह्न भोजन परोसा जाता है.

नौबतपुर के एक शिक्षक ने न्यूज़18 को बताया कि हमारे स्कूल में बच्चों को अब मिड-डे मील नहीं मिल रहा है. क्योंकि रसोइया अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. मिड डे मिल ना मिलने के कारण स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति 50 प्रतिशत से भी कम हो गई है.

न्यूज़18 की ख़बर के मुताबिक बिहार शिक्षा विभाग के विशेष सचिव और मिड-डे मिल के निदेशक बिनोद कुमार सिंह का कहना है कि यह नोटिस मिड-डे मिल कर्मियों को काम पर वापस लौटाने के लिए जारी किया गया है. अगर ये लोग काम पर नहीं लौटते हैं तो हम उनके स्थान पर दूसरे विकल्प की तलाश शुरू कर देंगे.

न्यूज़18 के मुताबिक वैशाली ज़िले के एक अन्य शिक्षक दिनेश कुमार ने भी कहा है कि मिड-डे मील के रसोइयों की चल रही हड़ताल ने स्कूलों में बच्चों को बुरी तरह प्रभावित किया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को अड़े नहीं रहना चाहिए और हड़ताली रसोइयों की मांगों को जल्द से जल्द सुनना चाहिए.

ग़ौरतलब है कि राज्य सरकार के रवैये का विरोध करते हुए मध्याह्न भोजन कर्मचारी संघ ने 4  फरवरी को बिहार में चक्का जाम किया था. एक्टू बिहार के नेता दिनेश दिनेश प्रसाद कुशवाहा का कहना है कि पटना में दो दिन तक चले प्रदर्शन को भी सरकार ने नज़रअंदाज़ किया.

ज्ञात हो कि बिहार के हजारों रसोइया जिसमें ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं,पिछले महीने जनवरी से श्रम कानूनों, मातृत्व अवकाश उच्च मानदेय, सरकारी कर्मचारी का दर्जा और न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये प्रति माह जैसी मांगों को लेकर कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं.

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