बेंगलुरु: भीड़ का कराची बेकरी के सामने प्रदर्शन, कहा- नाम से ‘कराची’ शब्द हटाओ
भीड़ में मौजूद लोगों ने अपनी पहचान बताने से इनकार करते हुए बेकरी के स्टॉफ को “कराची” शब्द को कवर करके बेकरी के भवन पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज लगाने के लिए कहा.
बेंगलुरू में शुक्रवार को कराची बेकरी आउटलेट को अपना मुख्य नाम ‘कराची’ शब्द को बोर्ड से हटाने के लिए मजबूर किया गया. दरअसल, पाकिस्तान का विरोध कर रही भीड़ ने बेकरी के सामने प्रदर्शन करते हुए नाम से कराची शब्द हटाने की मांग करने लगी. यह मामला पुलवामा आतंकी हमले के 1 हफ्ते बाद सामने आयी है.
जानकारी के मुताबिक़ यह घटना इंदिरानगर में 100 फीट रोड पर शुक्रवार शाम 8 बजे से 8.30 बजे के बीच हुई है. जब 20-25 आदमियों का एक समूह ने बेकरी के सामने इकट्ठा होकर नारे लगाने लगे और जोर देकर कहने लगे कि बेकरी का नाम बदल दिया जाए.
भीड़ में मौजूद लोगों ने अपनी पहचान बताने से इनकार करते हुए बेकरी के स्टॉफ को “कराची” शब्द को कवर करके बेकरी के भवन पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज लगाने के लिए कहा. इसके बाद स्टॉफ ने कराची शब्द को कवर करते हुए भवन पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज भी लगाया. हालांकि इस मामले में किसी प्रकार की हिंसा या संपत्ति को नुकसान होने की बात नहीं सामने आई.
वहीं, बेकरी के प्रबंधक ने द न्यूज़ मिन्ट से बात करते हुए कहा,”भीड़ लगभग आधे घंटे तक रही. उन्होंने हमसे नाम बदलने की मांग की. उन्होंने सोचा कि हम पाकिस्तान से हैं. लेकिन हम पिछले 53 वर्षों से इसी नाम का उपयोग कर रहे हैं. बेकरी के मालिक हिंदू हैं. केवल नाम कराची बेकरी है. भीड़ को संतुष्ट करने के लिए हमने भारतीय झंडा लगा दिया है. ” हालांकि, इस घटना के बाद भी बेकरी अपने निर्धारित समय 11 बजे तक काम करती रही.
बता दें कि कराची बेकरी की स्थापना खानचंद रामनानी ने की थी. जो 1947 में विभाजन के दौरान भारत आ गए थे. बेकरी का पहला आउटलेट हैदराबाद में खोला गया था और फिर यह पूरे देश में विकसित हुआ. यह बेकरी अपने फलों से बने बिस्कुट के लिए लोकप्रिय है.
विचारणीय है कि कराची बेकरी पर यह हमला उस दिन हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को कश्मीरी प्रतिष्ठानों के बहिष्कार के खिलाफ कार्रवाई करने और कश्मीरी छात्रों पर हुए हमले पर जांच का आदेश दिया. वहीं, जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की. साथ ही इस तरह की घटनाओं को दूर करने के लिए केंद्रीय मंत्रालय से एक नोडल अधिकारी की मांग की.
ग़ौरतलब है कि पुलवामा हमले के बाद, देहरादून, जोधपुर, अंबाला, पंचकुला, दिल्ली और पटना सहित देश के विभिन्न हिस्सों में कश्मीर के कई छात्रों और व्यापारियों पर भीड़ द्वारा हमला किया गया और उन्हें परेशान भी किया गया.