BBC रिपोर्ट का खुलासा- अब भी जस का तस खड़ा है बालाकोट का मदरसा, एक बार फिर सवालों के घेरे में मोदी सरकार का दावा
पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मीडिया और विदेशी राजनयिकों को बालाकोट में उस जगह ले गया जहां मोदी सरकार द्वारा बमबारी का दावा किया गया है.
बीते 10 अप्रैल को पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों को बालाकोट में बुलाया. यहां उसने मीडिया संगठनों को वह जगह दिखाई, जिसपर भारत ने दावा किया था कि 26 फरवरी को हमला कर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकाने को ध्वस्त कर दिया है.
पाकिस्तान आर्मी के मीडिया विंग के निदेशक जनरल आसिफ़ गफ़ूर ने ट्विटर पर लिखा, “भारत सहित दुनिया भर के पत्रकारों के एक समूह को बालाकोट में ले जाया गया, जहां उन्हें 26 फरवरी को भारतीय हमले की जगह दिखाई गई. यहां पत्रकारों ने पाया कि ग्राउंड पर सच्चाई कुछ और ही है, जो भारतीय दावे के उलट है.”
A group of international media journalists mostly India based and Ambassadors & Defence Attachés of various countries in Pakistan visited impact site of 26 February Indian air violation near Jabba, Balakot. Saw the ground realities anti to Indian claims for themselves. pic.twitter.com/XsONflGGVP
— DG ISPR (@OfficialDGISPR) April 10, 2019
इससे पहले भी पाकिस्तान बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने को ध्वस्त करने के भारतीय दावे को झुठलाता रहा है. लेकिन अबकी बार बात सिर्फ पाकिस्तान की नहीं है. बीबीसी हिन्दी ने भी उस जगह पर रिपोर्टिंग की विडियो को पोस्ट किया है, जिसमें कहा गया है, “हमने ग्राउंड पर एक गड्ढा देखा. हमें बताया गया कि यही वह जगह है जहां भारतीय वायुसेना ने पेलोड गिराया था. वह इलाका रेतीला था.” इसके बाद रिपोर्टर उस मदरसे के बारे में बताता है, जिसे जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी ठिकाना माना जाता है- यहां काफी तादाद में बच्चे पढ़ रहे हैं और किसी भी मदरसे के अंदर का जो मंजर हो सकता है, वही यहां नज़र आ रहा है. हमारे साथ कुछ और पत्रकार और राजदूत मौजूद हैं.”
इस विडियो में मदरसे में बच्चों को पढ़ाई करते देखा और सुना जा सकता है.
BBC EXCLUSIVE: पाकिस्तानी सेना की निगरानी में बीबीसी की टीम पहुंची बालाकोट के उस मदरसे के भीतर, जहां भारत ने हवाई हमले का दावा किया था… pic.twitter.com/5Zue9U8Ipe
— BBC News Hindi (@BBCHindi) April 10, 2019
एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक अटलांटिक काउंसिल डिजिटल फॉरेंसिक रिसर्च लैब का कहना है कि सेटेलाइट तस्वीरों में देखा जा सकता है कि भारतीय हमले का असर सिर्फ जंगल क्षेत्र में ही हुआ है. इसके आसपास के घरों पर कोई नुक़सान नहीं हुआ है.”
गफ़ूर ने दावा किया है कि इस मदरसे के पास कोई भी कभी भी जाकर देख सकता है. उनका कहना है, “आप देख सकते हैं कि यह एक औसत सा पुराना घर है. किसी भी तरह से इसकी क्षति नहीं हुई है. भारत के दावे में कोई सच्चाई नहीं है.”
बता दें कि भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में एयर स्ट्राइक के कारण मारे गए लोगों की कोई संख्या नहीं बताई है. लेकिन, अलग-अलग मौके पर भारतीय जनता पार्टी के नेता अलग-अलग आंकड़े बताते रहते हैं. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दावा किया था कि बालाकोट एयर स्ट्राइक में 250 से ज्यादा आतंकी मारे गए. अमित शाह के इस बयान को सेना के राजनीतिकरण से जोड़कर देखा गया है.