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अयोध्या: राम मंदिर माँगने पहुँचे लाखों, लेकिन स्थानीय लोग चाहते हैं बेरोज़गारी से निजात

अयोध्या निवासियों का कहना है कि चुनाव आते ही राम मंदिर का मुद्दा ज़ोर-शोर से उठाया जाता है.

राम मंदिर और अयोध्या को लेकर देश भर में भाजपा सरकार और अन्य हिन्दुत्ववादी ताक़तों ने पूरा दम लगाकर सांप्रदायिक तनाव का एक माहौल बनाने की कोशिश की है. विश्व हिन्दू परिषद द्वारा ‘धर्म सभा’ के आयोजन की वजह से अयोध्या में भारी संख्या में राम मंदिर की मांग लेकर आए हिन्दुत्ववादी संगठनों के कार्यकर्ताओं और लोगों का तांता लगा हुआ है. लेकिन क्या अयोध्या के स्थानीय लोग भी यही चाहते हैं या उनकी समस्याएं और मांगें कुछ और हैं? राम मंदिर के निर्माण को लेकर उनकी सोच क्या है? इस विषय में न्यूज़सेंट्रल24×7 ने अयोध्या के स्थानीय लोगों से बातचीत की.

दिलचस्प बात यह है कि जहां हिन्दुत्ववादी संगठन राम मंदिर के इस मामले को अयोध्या और पूरे देश के लोगों का एक महत्वपूर्ण विषय के रूप में साबित करने में लगे हैं, वहीं अयोध्या निवासियों के लिए मंदिर-मस्जिद नहीं बल्कि खुले में शौच की समस्या, बेरोज़गारी जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं. अयोध्या के लोग सबसे ज़्यादा बेरोज़गारी से परेशान हैं. यहां के लोगों का कहना है कि हर बार चुनावों से पहले राम मंदिर का मुद्दा उठाया जाता है. भगवा संगठनों के शहर में आने से तनाव का माहौल बढ़ जाता है, जिसकी वजह से व्यपारियों को बहुत नुकसान उठाना पड़ता है.

न्यूज़सेंट्रल24×7 के संवाददाता दीपक कुमार ने शहर में लोगों से बात कर इस मामले में उनकी राय जानने की कोशिश की.

अधेड़ उम्र के राम कुमार ने कहा कि लोगों को इस मंदिर-मस्जिद के विवाद से कोई मतलब नहीं है और खासकर तब जब शहर में बेरोज़गारी की समस्या इतनी बढ़ी हुई है. उन्होंने बताया, “मंदिर मस्जिद से हमको क्या मतलब? जब रोज़ी-रोटी का रास्ता ही नहीं, साधन ही नहीं है कुछ. पढ़े लिखे नौजवान, बच्चे घूम रहे हैं इधर-उधर तो उससे (मंदिर-मस्जिद से) हम लोगों को क्या मतलब?” उन्होंने आगे कहा, “हर पांच साल में एक बार विधायक और सांसद आकर हमारे पैर छूकर वोट मांगते हैं और फिर ग़ायब हो जाते हैं.”

नन्द किशोर पेशे से ड्राईवर हैं. उन्होंने शहर में बढ़ती बेरोज़गारी के बारे में चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा, “यहाँ कोई फैक्ट्री नहीं है. मेरे सारे बच्चे कॉलेज से ग्रेजुएट हो चुके हैं लेकिन फिर भी उनके पास कोई नौकरी नहीं है. केंद्र के पास हमारे लिए कोई योजनायें नहीं हैं. हमने कोई विकास नहीं देखा.”

शहर के नगर निगम में बतौर सुपरवाइज़र काम कर रहे आशिक अली ने बताया कि अयोध्या के हिंदू-मुसलिम सभी लोग मिल-जुल कर रहते हैं. लेकिन बाहर से आए लोग जो तनाव का माहौल तैयार करते हैं उसका सभी जिंदगियों पर प्रभाव पड़ता है. उन्होंने आगे बताया कि 6 दिसम्बर, 1992 में जो घटना घटी, उसकी वजह से लोग बहुत डरे हुए रहते हैं. उन्होंने कहा, “अगर अफवाह उड़ती है तो सभी रास्ते सुनसान हो जाते हैं. व्यवसाय प्रभावित होता है इसलिए दुकानदारों को भी इसका हर्जाना भुगतना पड़ता है. आप अपनी आँखों से देख सकते हैं कि दुकानें खुली हुई हैं लेकिन लोग नहीं आ पाते हैं.”

स्थानीय लोगों ने बताया कि जिस तरह की परिस्थितियाँ बनी हैं उसकी वजह से परिवारों में औरतें शहर छोड़कर चली जाती हैं और मर्द घर पर रह जाते हैं. मोहम्मद मोईन ने बताया कि धर्म सभा की वजह से लोग इतनी बड़ी संख्या में आए हैं जिससे डरकर औरतें इस तरह से चली जाती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के लोग मंदिर-मस्जिद जैसी चीज़ों के बारे में सोचकर वोट नहीं करते.

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