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एनआरसी विवाद: मोदी ने दिया था आश्वासन- एनआरसी से बाहर लोगों को नहीं भेजेंगे बांग्लादेश

कुछ महीने पहले गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा था कि उनकी सरकार एनआरसी लिस्ट में छूटे लोगों को बांग्लादेश नहीं भेजेगी।

एनआरसी मामले में मोदी सरकार के रूख को लेकर एक नई सच्चाई सामने आई है। बांग्लादेश के एक उच्च अधिकारी ने  कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने बांग्लादेशी समकक्ष शेख हसीना से व्यक्तिगत तौर पर कहा है कि जिन लोगों का नाम एनआरसी में शामिल नहीं है, भारत सरकार उन्हें बांग्लादेश वापस नहीं भेजेगी। कुछ महीने पहले गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी ऐसा ही बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार एनआरसी लिस्ट में छूटे लोगों को बांग्लादेश नहीं भेजेगी।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के राजनीतिक सलाहकार एचटी इमाम ने पीटीआई को बताया, “भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से हमारी प्रधानमंत्री को आश्वासन दिया है कि एनआरसी सूची से बाहर किए गए लोगों को बांग्लादेश नहीं भेजा जाएगा।”  हालांकि, इमाम ने दोनों देशों के प्रमुखों के बीच हुई बातचीत के बारे में विस्तार से नहीं बताया।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि हमें भारत द्वारा बार-बार आश्वासन दिया गया है कि भारत सरकार किसी भी तरह से बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा नहीं होने देगी। गौरतलब है कि इसी साल के आख़िर में भारत और बांग्लादेश में चुनाव होने हैं।

एचटी इमाम ने कहा, “ढाका में भारतीय उच्चायुक्त हर्षवर्धन श्रिंगला ने हमेशा से हमें आश्वस्त किया है। उन्होंने कहा कि यह मामला भारत का घरेलू मामला है और इससे बांग्लादेश का कोई लेना देना नहीं है।

असम में रह रहे भारतीय नागरिकों की वास्तविक पहचान करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एनआरसी की निगरानी की गई थी। बीते 30 जुलाई को एनआरसी के अंतिम मसौदे का प्रकाशन हुआ था। इस सूची में 40 लाख से अधिक लोगों का नाम नहीं होने की वजह से इसपर राजनीतिक विवाद शुरू हुआ था। सितंबर में बीजेपी के महासचिव राम माधव ने कहा था कि जिन लोगों का नाम एनआरसी में शामिल नहीं है, उन्हें भारत से बाहर निकाल दिया जाएगा।

एचटी इमाम ने कहा कि 1947 में भारत विभाजन के कारण दोनों देशों से बड़ी संख्या में पलायन हुआ था। इस दौरान जो लोग जिस देश में बस गए, वहां के नागरिक बन गए।

उन्होंने कहा, ” आज भारत में कई बंगाली नेता हैं जो राजनीति के शीर्ष पदों पर हैं, क्या उन्हें भी घुसपैठिया माना जाना चाहिए और बांग्लादेश वापस भेज दिया जाना चाहिए?”

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