अनिल अंबानी का रिलायंस कम्युनिकेशंस दिवालिया घोषित, कंपनी पर बैंकों का 50 हज़ार करोड़ बकाया
रिलायंस कम्युनिकेशंस अंबानी ग्रुप की पहली कंपनी है जिसे दिवालिया घोषित किया गया है.
अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) को बड़ा झटका लगा है. राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. कंपनी पर अलग-अलग बैंकों का 50,000 करोड़ रुपए से भी ज़्यादा का कर्ज़ है.
नवभारत टाइम्स की ख़बर के अनुसार रिलायंस कम्युनिकेशंस अंबानी ग्रुप की पहली कंपनी है जिसे दिवालिया घोषित किया गया है. एनसीएलटी ने बीते बृहस्पतिवार (9 मई) को कंपनी के निदेशक मंडल को भंग कर दिया है. भारतीय स्टेट बैंक (एबसीआई) की अगुवाई वाली 31 बैंकों के समूह ने ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) बनाने की अनुमति दी है. कोर्ट में सुनवाई के दौरान रिलायंस कम्युनिकेशंस ने 30 मई 2018 से 30 अप्रैल 2019 तक की अवधि यानी 357 दिनों की दिवालिया प्रक्रिया में छूट मांगी है. कंपनी ने कहा कि इस अवधि के दौरान उसे न्यायाधिकरण और उच्चतम न्यायालय से दिवालिया प्रक्रिया पर मोहलत मिली थी.
वीपी सिंह और आर दुरईसामी की पीठ ने कहा, इस मामले को कानून और दिशानिर्देशों के अनुरूप आगे बढ़ाना चाहिए. न्यायाधिकरण ने रिलायंस इन्फ्राटेल और रिलायंस टेलीकॉम तथा रिलायंस कम्युनिकेशंस को उपरोक्त अवधि की छूट दे दी है. इस मामले में अगली सुनवाई 30 मई को होगी.
बता दें कि संकट से जूझ रही रिलायंस कम्युनिकेशंस ने तकरीबन 2 साल पहले अपना परिचालन बंद कर दिया था. कंपनी ने रिलायंस जियो को बेचकर दिवालिया प्रक्रिया से बचने की कोशिश की थी लेकिन उससे भी कंपनी की हालात ठीक नहीं हुई. इसके अलावा कंपनी रीयल एस्टेट और स्पेक्ट्रम संपत्तियों का मौद्रिकरण कर बैंकों का पैसा लौटाने का अपना वादा पूरा करने में विफल साबित हुई.
ग़ौरतलब है कि पिछले महीने रिलायंस कम्युनिकेशंस के चेयरमैन अनिल अंबानी को अवमानना मामले में बड़े भाई मुकेश अंबानी ने 480 करोड़ की मदद देकर उन्हें जेल जाने से बचा लिया था. दरअसल, उच्चतम न्यायालय ने रिलायंस कम्युनिकेशंस को एरिक्सन का बकाया चुकाने का निर्देश दिया था. जिसका पालन आरकॉम नहीं किया पाई थी. जिसके चलते अनिल अंबानी को जेल होनी थी. हालांकि अंतिम समय में मुकेश अंबानी की सहायता ने उन्हें जेल जाने से बचा लिया था.