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मध्यप्रदेश के आक्रोशित युवाओं ने कहा, 1 करोड़ रुपये भी मिले तब भी हम भाजपा को वोट नहीं देंगे

किसानों ने फ़सल बीमा योजना को धोखाधड़ी करार दिया और आधार कार्ड को कमज़ोर लोगों को यातना देने का तरीका बताया.

मध्यप्रदेश में चुनावों से पहले आधार संबंधित समस्याएं, नोटबंदी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) जैसे मुद्दों को लेकर ग्रामीण जनता में भाजपा के ख़िलाफ़ खासा क्रोध व्याप्त है.

टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के किसानों और आदिवासी समाज विशेष तौर पर झाबुआ, धार और खरगोन ज़िलों के आदिवासियों को महसूस होता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें और अधिक नीचे ला दिया है.

धार के बदावेली गांव के एक आदिवासी युवा का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी एक बड़े नेता हो सकते हैं लेकिन उनके ज़्यादातर फ़ैसले ग़लत हैं. एक युवक ने कहा, “अगर वे मुझे एक करोड़ रुपये भी देंगे तब भी मैं भाजपा को वोट नहीं दूंगा.”

सरकारी लाभों का दावा करने के लिए आधार अनिवार्य करने की बात पर ग्रामीण राम पास्या ने बताया कि ज़्यादातर  ग्रामीण आधार औपचारिकताओं की समस्याओं को हल करने में समय बिता देते हैं. अधिकारी सबसे पहले कहेंगे कि नाम ग़लत है, उपनाम जोड़ा नहीं गया है, फ़ोन नंबर लिंक नहीं है. चारों तरफ दौड़-भाग करने के बाद जब सब कुछ ठीक कर लेते हैं तो वहां नेटवर्क लिंक नहीं होगा या फिंगरप्रिंट मेल नहीं खाते. आधार के कारण छात्रों को स्कूल में प्रवेश नहीं मिला. यह विचार सबसे कमज़ोर लोगों को यातना देने के लिए बनाया गया था.

आखिर में किसानों ने फ़सल बीमा योजना को धोखाधड़ी करार देते हुए कहा कि उन्हें सोयाबीन, चने जैसी फ़सलों के लिए एमएसपी नहीं मिली. राज्य की ग्रामीण आबादी इसलिए भी परेशान है क्योंकि यहां के युवाओं को गुजरात और महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों में जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

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