सामाजिक कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई विचलित करने वाली है : एमनेस्टी, ऑक्सफैम
ऑक्सफैम इंडिया के सीईओ अमिताभ बेहर ने कहा, ‘‘ये गिरफ्तारियां सामान्य नहीं हो सकती। सरकार को डर का माहौल बनाने के बजाय अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण रूप से एकत्रित होने के लोगों के अधिकार की रक्षा करनी चाहिए।’’
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया और ऑक्सफैम इंडिया ने आज एक संयुक्त बयान में कहा कि देशभर में सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई विचलित करने वाली है और यह मानवाधिकारों के मूल सिद्धांतों के लिए खतरा है।
यह प्रतिक्रिया तब आई है जब महाराष्ट्र पुलिस ने कई राज्यों में वामपंथी कार्यकर्ताओं के घरों पर आज छापा मारा और माओवादियों से संपर्क रखने के संदेह में उनमें से कम से कम चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इस कदम का कई वकीलों, विद्धानों और लेखकों ने विरोध किया है। कुछ ने इसे ‘‘पूरी तरह डराने वाला’’ बताया और अन्यों ने कहा कि यह ‘‘आभासी तौर पर आपातकाल की घोषणा है।’’
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के कार्यकारी निदेशक आकार पटेल ने कहा, ‘‘आज की गिरफ्तारियां मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों और पत्रकारों पर ऐसी दूसरी कार्रवाई है जो सरकार के आलोचक रहे हैं। इन सभी लोगों का भारत के सबसे गरीब और उपेक्षित लोगों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए काम करने का इतिहास रहा है। उनकी गिरफ्तारियों से ये विचलित करने वाले सवाल पैदा होते हैं कि क्या उन्हें उनके काम के लिए निशाना बनाया जा रहा है।’’
ऑक्सफैम इंडिया के सीईओ अमिताभ बेहर ने कहा, ‘‘ये गिरफ्तारियां सामान्य नहीं हो सकती। सरकार को डर का माहौल बनाने के बजाय अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण रूप से एकत्रित होने के लोगों के अधिकार की रक्षा करनी चाहिए।’’
पिछले साल 31 दिसंबर को एलगरर परिषद के एक कार्यक्रम के बाद पुणे के पास कोरेगांव- भीमा गांव में दलितों और उच्च जाति के पेशवाओं के बीच हुई हिंसा की घटना की जांच के तहत ये छापे मारे गए हैं।
जून में दलित कार्यकर्ता सुधीर धावले को मुंबई में उनके घर से गिरफ्तार किया गया था, जबकि वकील सुरेंद्र गाडलिंग, कार्यकर्ता महेश राऊत और शोमा सेन को नागपुर से तथा रोना विल्सन को दिल्ली में मुनिरका स्थित उनके फ्लैट से गिरफ्तार किया गया था।