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इस चुनाव में नहीं हुई नेहरू और कांग्रेस की विचारधारा की हार, जनता को डराकर मांगे गए वोट: अमर्त्य सेन

“इसमें कोई शक नहीं है कि नरेन्द्र मोदी एक अच्छे वक्ता और करिश्माई नेता हैं.. अच्छा वक्ता होने के कारण नरेन्द्र मोदी ने जनता का ध्यान मुद्दों से भटकाकर नफ़रत की बात की और लोगों को गुमराह करने में कामयाब रहे.”

नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी और नरेन्द्र मोदी की विचारधारा ने इस चुनाव में जीत हासिल नहीं की है, बल्कि यह जीत आतंकवाद, पाकिस्तान और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दे पर ध्यान भटकाकर हासिल की गई है.

द टेलीग्राफ़ के अनुसार न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में अमर्त्य सेन ने कहा है कि इस देश में नेहरू, गांधी, रवीन्द्रनाथ टैगोर और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की विचारधारा की हार नहीं हुई है, बल्कि नरेन्द्र मोदी की वाक्पटुता और मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाकर यह चुनाव जीता गया है.

अमर्त्य सेन ने कहा है, “इसमें कोई शक नहीं है कि नरेन्द्र मोदी एक अच्छे वक्ता और करिश्माई नेता हैं.. अच्छा वक्ता होने के कारण नरेन्द्र मोदी ने जनता का ध्यान मुद्दों से भटकाकर नफ़रत की बात की और लोगों को गुमराह करने में कामयाब रहे.”

आगे अमर्त्य सेन ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने आम चुनाव में कांग्रेस पार्टी से कई गुना ज्यादा पैसे ख़र्च किए. इसके साथ ही मीडिया पर भी अथाह पैसे खर्च किए. सरकार के टीवी चैनल दूरदर्शन ने नरेन्द्र मोदी की सभाओं को विपक्षी दलों की सभा से दोगुना समय दिया.

अमर्त्य सेन ने कहा है कि 2014 के चुनाव में नरेन्द्र मोदी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार, रोज़गार और अर्थव्यवस्था की स्थिति में सुधार का वादा किया था, लेकिन इन वादों को पूरा नहीं करने के कारण नरेन्द्र मोदी ने इस चुनाव में भारत के लोगों को डरा कर वोट लिया. आतंकवाद के नाम पर वोट मांगा गया. पाकिस्तान का भय दिखाकर वोट इस चुनाव में मांगे गए. इसलिए यह चुनाव नेहरू और कांग्रेस की विचारधारा की हार नहीं बल्कि मुद्दों से ध्यान बांटने के कारण जीता गया है.

बता दें कि भारतीय जनता पार्टी ने आम चुनाव में 303 सीट हासिल की है. भारतीय जनता पार्टी के लिए यह चुनाव परिणाम 2014 के बाद के लोकसभा चुनाव से भी ज्यादा उत्साहित करने वाले हैं.

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