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सीबीआई में फेर-बदल को लेकर एक और अफ़सर पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, राकेश आस्थाना के ख़िलाफ़ कर रहा था जांच

सीबीआई के डिप्टी एसपी एके बस्सी ने एक याचिका दायर कर कहा है कि राकेश आस्थाना के रिश्वत लेने के मामले में उनके पास काफ़ी सबूत हैं.

सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश आस्थाना मामले में केंद्र सरकार के हस्तक्षेप को लेकर एक और अफ़सर ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया है. सीबीआई अफ़सर एके बस्सी ने मोदी सरकार द्वारा किए गए अपने तबादले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. हालांकि कोर्ट ने इसपर तुरंत सुनवाई करने से इनकार किया है.

दरअसल, बस्सी सीबीआई के विशेष डायरेक्टर राकेश आस्थाना के ख़िलाफ़ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रहे थे. बीते 24 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और सीबीआई विशेष निदेशक राकेश आस्थाना को छुट्टी भेज दिया था. इसके तुरंत बाद ही आस्थाना के ख़िलाफ़ जांच कर रहे 13 अफ़सरों का भी तबादला कर दिया था. डिप्टी एसपी एके बस्सी का तबादला अंडमान व निकोबार के पोर्ट ब्लेयर में कर दिया गया था.

एके बस्सी ने बताया- राकेश आस्थाना के ख़िलाफ़ हैं पर्याप्त सबूत

द वायर के अनुसार एके बस्सी ने अपने दायर याचिका में बताया है कि राकेश आस्थाना के रिश्वत लेने के मामले में उनके पास काफ़ी सबूत है. उनके पास यह सबूत फ़ोन कॉल्स, व्हाट्सैप, मैसेजेस के रूप में है. सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में एसआईटी गठित कर जांच करवानी चाहिए.

बता दें कि राकेश आस्थाना पर मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में मीट कारोबारी मोइन कुरैशी को क्लीन चीट देने के लिए कथित तौर पर घूस लेने का आरोप लगा है. इसके बाद सीबीआई ने अपने ही विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज़ कराई थी. सीबीआई ने अपने ही दफ्तर में छापा मारकर डीएसपी देवेंद्र कुमार को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था.

इससे पहले भी सरकार के फ़ैसले को दी गई है चुनौती, फ़ैसला आना बाक़ी

सरकार द्वारा छुट्टी पर भेजे जाने से नाराज़ सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसके साथ ही बीते 26 अक्टूबर को एनजीओ कॉमन कॉज ने भी इस फेर-बदल के संदर्भ में कोर्ट में याचिका डाली थी. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) सुप्रीम कोर्ट जज के निगरानी में इस मामले की जांच दो हफ़्ते में पूरी करे.
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा था कि हम जनहित को देखते हुए इस मामले को ज़्यादा लंबा नहीं खींच सकते हैं.

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