सरकार की मौजूदा नीतियों को फिर से देखने की जरूरत, विमानन उद्योग में संकट का दौर: एअर इंडिया यूनियन
निजीकरण देश की इस सरकारी एयरलाइन की समस्या का कोई हल नहीं हो सकता.
जेट एयरवेज के ताजा संकट के बीच एयर इंडिया की एक यूनियन ने कहा है कि निजीकरण देश की इस सरकारी एयरलाइन की समस्या का कोई हल नहीं हो सकता. उनका कहना है कि जेट एयरवेज और किंगफिशर के हालात से उनकी यह यह बात साबित हुयी है.
एअर कॉरपोरेशन एंप्लॉयी यूनियन (एसीईयू) के वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को सरकार को भी सुझाव दिया कि वह एअर इंडिया के निजीकरण की योजना पर दोबारा विचार करें.
जेट एयरवेज के 20,000 कर्मचारियों का समर्थन करते हुए अधिकारी ने कहा कि सरकार की मौजूदा नीतियों को फिर से देखने की जरूरत है क्योंकि इससे विमानन उद्योग में संकट का दौर ही आया है और हजारों लोगों की नौकरी दांव पर आ गयी.
इससे पहले भारी कर्ज के चलते 2012 में निजी क्षेत्र की किंगफिशर बंद हो गयी थी. वहीं जेट एयरवेज पर 8,500 करोड़ रुपये का बकाया है जिसके चलते वह पिछले बुधवार से अस्थायी तौर पर बंद है.