हज़ारों महिलाओं ने भाजपा के मोदी शासन मे बढ़ती हिंसा, भय, भूख और बेरोजगारी के खिलाफ दिल्ली में किया प्रदर्शन
तेज़ बारिश होने के बावजूद भी यह महिलाएँ रैली में डटी रहीं, कहा मोदी सरकार को गद्दी से उतार कर रहेंगे।
ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेन एसोसिएशन (एड्वा) के बैनर तले महिलाओं ने कल मंडी हाउस से संसद मार्ग तक विशाल प्रतिरोध रैली निकाली। इस रैली में महाराष्ट्र, बिहार और केरल समेत देश भर के 23 राज्यों से हज़ारों की संख्या में महिलाएँ शामिल हुईं। तेज़ बारिश होने के बावजूद भी यह महिलाएँ रैली में डटी रहीं और 3 किलोमीटर का रास्ता तय करके संसद मार्ग पहुँचीं। रैली का मकसद मोदी सरकार के ख़िलाफ़ अपना विरोध जताना और अपनी मांगों को पूरा करवाना था।
एआईडीडब्लूए ने महिला हिंसा, अपराध, भूखमरी और बेरोज़गारी से मुक्ति की मांग की। साथ ही, एड्वा की महा सचिव मरियम धावले ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगले साल किसी घर की छत पर भाजपा का झंडा नहीं दिखेगा। संगठन की वरिष्ठ नेता वृंदा करात ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि ख़ुद भाजपा के ही कार्यकर्ता बलात्कार जैसे जघन्य अपराध करते हैं और उनके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वालों को झूठे आरोप लगा कर जेल में बंद कर दिया जाता है। एड्वा ने भाजपा का विरोध करते हुए मोदी सरकार को गद्दी से उतारने की बात कही। साथ ही आरोप लगाया कि मोदी सरकार आदिवासियों की ज़मीन हड़पने और लोकतंत्र के स्थान पर मनुवाद फैलाने की नीति अपना रही है।
विशाल प्रतिरोध रैली में किसानों की आत्महत्या और फ़सल का सही मूल्य न मिलना, किसान ऋण पास न करना, गैस सब्सिडी और राशन जैसे मुद्दों को लेकर अलग-अलग राज्यों से न केवल महिलाएं बल्कि उनके समर्थन में पुरुष भी आए थे। अमरावती, महाराष्ट्र से आई महिलाओं ने बताया कि उनकी रोज़ की आमदनी 100 रुपये है लेकिन महीने का गैस सिलिंडर पर ही सब्सिडी की वजह से 850-900 तक खर्च हो जाते हैं जिसके कारण पूरे महीने घर चलाना मुश्किल हो जाता है। ईंधन का कोई और साधन भी उपलब्ध नहीं है और गैस सब्सिडी के नाम पर आने वाली राशि भी बहुत कम है। उन्होंने आपनी मांग रखते हुए कहा कि सरकार सब्सिडी बंद कर दे और पहले की तरह सस्ते सिलिंडर उपलब्ध करवाए।
गौरतलब है कि कठुआ रेप केस पीढ़िता के लिए लड़ने वाली वक़ील, दिपिका भी जम्मू से यहां एआईडीडब्लू के इस कार्यक्रम का समर्थन करने पहुँचीं। दिपिका ने आपने भाषण में कहा कि 8 साल की बच्ची के साथ बलात्कार किया जाता है और उसे इंसाफ दिलाने की कोशिश करने वाली वकील को डराया जाता है। उन्होंने कहा मेरी खुद 6 साल की बेटी हैं और मुझे हर वक़्त उसकी चिंता लगी रहती है।

रैली में आई एक महिला ने उत्तरप्रदेश के उन्नाव में हुए सामूहिक बलात्कार का ज़िक्र करते हुए कहा कि न वे योगी मानते हैं और न ही योगी की सरकार को मानते हैं जो अपराधियों का साथ देती है। भाजपा पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि ‘बेटी बचाओ’ के नारे को बदल कर ‘भाजपा से बेटी बचाओ’ कर देना चाहिए।
एड्वा ने अपनी मांगों के बारे में बताते हुए कहा कि उनकी मांग है कि आंगनवाड़ी में दोपहर का भोजन और आशा कर्मचारी जो इन कार्यक्रमों को लागू करती हैं उन्हें सरकारी कर्मचारी के रूप में मान्यता और उचित वेतन दिया जाए। वहीं दूसरी ओर मोदी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी न हुई तो सरकार के ख़िलाफ़ इससे भी बड़ी रैली निकाली जाएगी। ज्ञात हो कि एड्वा की अगली रैली 10 दिसंबर यानी मानव अधिकार दिवस के दिन आयोजित की जाएगी।