मात्र बारह सौ का वेतन देकर स्कूलों में खाना बनवा रही है मोदी सरकार: रसोईया संगठन
मजदूर संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार बड़े पूंजीपतियों के हित के लिए मजदूरों के धन का इस्तेमाल कर रही है.
न मोदी, न योगी, न जय श्रीराम… देश पर राज करेगा मजदूर और किसान. ये शब्द हैं देश के रसोइया संगठनों के. जो मात्र बारह सौ रुपये में स्कूलों में खाना बनाने के लिए मजबूर हैं.
ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) के साथ अन्य रसोईया संगठनों ने सोमवार को संसद मार्ग पर मध्याह्न भोजन कर्मियों की मांगों को लेकर हज़ारों की संख्या में मोदी सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश समेत देश के कई राज्यों से रसोइ कर्मी यहां मौजूद रहे.
ऐक्टू की ओर से कहा गया कि देश में जब से मोदी सरकार आई है. जनकल्याण योजनाओं के बजट में लगातार कटौती की जा रही है. सरकार कॉरपोरेट घरानों, बड़े पूंजीपतियों के हित में न सिर्फ मजदूरों-कर्मचारियों के धन का इस्तेमाल कर रही है, बल्कि देश के हर बड़े संस्थान की इज़्ज़त भी दांव पर लगा रही है.

प्रदर्शन में शामिल ऐक्टू के राष्ट्रीय महासचिव राजीव डिमरी का कहना है कि मोदी सरकार आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी इस स्कीम का लगातार निजीकरण करने पर तुली है. इस सेक्टर में बजट बढ़ाने की बजाय लगातार कटौती की जा रही है. उन्होंने केंद्र सरकार से सभी प्रकार के स्कीम वर्कर्स को न्यूनतम वेतन देने तथा उनके सम्मानजनक रोजगार की गारंटी देने की मांग की.
ऐक्टू से संबंधित बिहार के राज्य विद्यालय रसोइया संघ की सरोज चौबे ने कहा कि बिहार सरकार भी रसोइयों के हितों पर ध्यान देने के बजाय केंद्र सरकार के नक्शे-कदम पर चल रही है. हाल ही में, ऐक्टू से संबद्ध बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ के नेतृत्व में पांच-दिवसीय हड़ताल की गई थी. उन्होंने कहा कि “हमें राज्य व केंद्र दोनों सरकारों के ख़िलाफ़ अपने हक और अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा. इसीलिए हम इतनी बड़ी संख्या में बिहार से दिल्ली आए हैं.”
ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन की गीता मंडल ने कहा कि केंद्र सरकार मात्र 1250 रुपये में काम करवा कर देशभर के रसोई कर्मियों का रात-दिन शोषण कर रही है. गीता की मांग है कि रसोई कर्मियों को न्यूनतम 18,000 का वेतनमान मिलना चाहिए. इस काम को करने वाली अधिकतर महिलाएं हैं, सरकार को उनकी सुरक्षा तथा सम्मानजनक रोजगार की गारंटी करनी चाहिए.

सांसद डी.राजा तथा जवाहरलाल लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष एन.साई.बालाजी ने धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए रसोईया कर्मियों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया. मिड-डे मील कर्मियों की मांगों को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली को रसोईया संगठनों तथा केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की तरफ़ से ज्ञापन भी सौंपा गया है.
ऐक्टू समेत सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने ज़ोर देते हुए कहा कि मोदी सरकार अपनी मज़दूर विरोधी नीतियों से देश की हालत दिन ब दिन ख़राब कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि आगामी 8 और 9 जनवरी को देशभर के मज़दूर संघर्ष को अधिक तेज़ करते हुए सभी यूनियन साथ मिलकर केंद्र सरकार के विरुद्ध दो दिन की हड़ताल करेगी.