एबीवीपी की गुंडागर्दी: अहमदाबाद विश्वविद्यालय में अब नहीं पढ़ाएंगे इतिहासकार रामचंद्र गुहा
“एबीवीपी की वजह से रामचंद्र गुहा के ऊपर काफी ख़तरा था और उनके ऊपर हमला हो सकता था.”
प्रसिद्ध इतिहासकार एवं जीवनी लेखक रामचंद्र गुहा अब गुजरात के अहमदाबाद विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ाएंगे. इसकी पुष्टि उन्होंने अपने एक ट्वीट के ज़रिये की. रामचंद्र गुहा ने अपने ट्वीट लिखा, “मेरे नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण, मैं अहमदाबाद विश्वविद्यालय में शामिल नहीं हो पाऊंगा। मैं एयू को शुभकामनायें देता हूँ; इसमें अच्छे विभाग और एक उत्कृष्ट कुलपति हैं. गांधीजी की आत्मा एक दिन अपने मूल गुजरात में दोबारा ज़िंदा हो.
Due to circumstances beyond my control, I shall not be joining Ahmedabad University. I wish AU well; it has fine faculty and an outstanding Vice Chancellor. And may the spirit of Gandhi one day come alive once more in his native Gujarat.
— Ramachandra Guha (@Ram_Guha) November 1, 2018
ज्ञात हो कि 16 अक्टूबर को अहमदाबाद विश्वविद्यालय द्वारा रामचंद्र गुहा की मानविकी के श्रेनिक लालभाई चेयर प्रोफेसर और विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेस में गांधी विंटर स्कूल के निदेशक के रूप में नियुक्ति की थी. लेकिन गुहा की नियुक्ति को लेकर आरएसएस की छात्र ईकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) द्वारा 19 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन किया गया था और उनके द्वारा मांग की गई थी कि गुहा की नियुक्ति को रद्द कर दिया जाए. एबीवीपी ने रामचंद्र गुहा की किताबें भारत की हिंदू संस्कृति की कड़ी आलोचना की.
द वायर की रिपोर्ट के अनुसार अहमदाबाद के एबीवीपी सचिव प्रवीन देसाई ने कहा, “हमने अहमदाबाद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार बीएम शाह से बात की और उनसे कहा कि हमें विश्वविद्यालय में बुद्धिजीवियों की ज़रुरत है, देशद्रोहियों की नहीं. ऐसे लोगों को अर्बन नक्सल भी कहा जा सकता है.” अपने विवादित बयान को जारी रखते हुए देसाई ने कहा, “हमने गुहा की किताब से राष्ट्रविरोधी चीजें रजिस्ट्रार के सामने पेश की थी. हमने कहा था कि आप जिस व्यक्ति को बुला रहे हैं वो वामपंथी है. यदि गुहा को गुजरात बुलाया जाता है तो जेएनयू की तरह यहां भी राष्ट्रविरोधी भावनाएं पनप जाएंगी.”
एबीवीपी द्वारा वाइस चांसलर को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया, ‘उनके लेखों ने बांटने की प्रवृत्तियों, व्यक्ति की आज़ादी के नाम पर अलगाववाद, व्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर आतंकवादियों को मुक्त करने और जम्मू-कश्मीर को भारतीय संघ से अलग करने जैसी चीज़ों को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और सेंट्रल यूनिवर्सिटी, हैदराबाद जैसे प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों में प्रोत्साहित किया है.’
वहीं दूसरी ओर एक सूत्र ने नाम न लिखने की शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि एबीवीपी की वजह से रामचंद्र गुहा के ऊपर काफी खतरा था और उनके ऊपर हमला हो सकता था.
विडम्बना की बात यह है कि एक प्रसिद्ध इतिहासकार और जीवनी लेखक जिसकी अहमदाबाद विश्वविद्यालय में नियुक्ति होने वाली थी, एबीवीपी के गुंडागर्दी के कारण उन्होंने विश्वविद्यालय में शामिल न होने का निर्णय कर लिया. अब क्या इस देश में विश्वविद्यालय में किसकी नियुक्ति की जाए और किसकी नहीं, इस बात का फैसला एबीवीपी करेगी?