उत्तर प्रदेशः धारा 370 के ख़िलाफ़ प्रदर्शन रोकने के लिए नज़रबंद किए गए रैमन मैगसेसे अवॉर्ड से सम्मानित संदीप पांडे
भाकपा माले ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे गैर-कानूनी कार्रवाई करार दिया है.
सामाजिक कार्यकर्ता और रैमन मैगसेसे अवॉर्ड से सम्मानित संदीप पांडे को पुलिस ने बीते रविवार को कुछ समय के लिए घर पर नज़रबंद कर दिया. संदीप पांडे ने आरोप लगाया कि यह नज़रबंदी धारा 370 के विरोध में धरना प्रदर्शन को रोकने के लिए की गई थी.
दरअसल संदीप पांडे, एडवोकेट मोहम्मद शोएब और एनएपीएम की सचिव अरुंधति धुरु बीते रविवार को लखनऊ के हजरतगंज में धरना प्रदर्शन का आयोजन करने वाले थे. लेकिन प्रदर्शन से ठीक पहले उन्हें उनके ही घर में नज़रबंद कर दिया गया. हालांकि पुलिस सभी आरोपों को खारिज कर रही है.
जनसत्ता की ख़बर के अनुसार संदीप पांडे ने बताया, “पुलिसवालों ने मुझसे कहा कि मैं शाम 4 बजे तक घर से बाहर नहीं निकल सकता. मैंने उन्हें बताया कि प्रदर्शन रोक दिया गया लेकिन बावजूद इसके उन्होंने मुझे नहीं जाने दिया. पुलिस तकरीबन 2 बजे वहां से चली गई.”
एडवोकेट मोहम्मद शोएब के अनुसार, “पुलिस की एक टीम रविवार सुबह उनके घर आई थी. पुलिस ने त्यौहार के कारण ड्यूटी में व्यस्त रहने की बात कहते हुए धरना वापस लेने की गुजारिश की. मैंने पुलिस वालों की बात मान ली और कार्यक्रम रद्द कर दिया. अब धरना प्रदर्शन 16 अगस्त को किया जाएगा.”
गाजीपुर पुलिस स्टेशन के सर्किल ऑफिसर दीपक कुमार सिंह का कहना है कि मोहम्मद शोएब के घर पुलिस की एक टीम यह बताने गई थी कि हाई कोर्ट के निर्देश के अनुसार गांधी प्रतिमा के पास प्रदर्शन नहीं किया जा सकता. हमने उन्हें इको गार्डन जाने की सलाह दी. जिसे आधिकारिक तौर पर प्रदर्शन की जगह घोषित किया गया है.
वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिन (भाकपा माले) ने संदीप पांडेय और अरुंधति धुरु की नज़रबंदी को लेकर कड़ी निंदा की है. उन्होंने इस घटना को उत्तर प्रदेश प्रशासन द्वारा कानून को हाथ में लेने की गैर क़ानूनी कार्यवाही करार दिया है.
भाकपा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की सरकार लोकतांत्रिक विरोधों को दबाने की कार्यवाई करके नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और देश के लोकतांत्रिक ताने बाने पर हमला कर रही है.