हिंसा पर सख्त गहलोत सरकार, मॉब लिंचिंग के लिए आजीवन कारवास और ऑनर किलिंग के लिए फांसी की सजा
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य मॉब लिंचिंग और ऑनर किलिंग जैसे अपराध व हिंसा करने वाले दोषियों को गंभीर रूप से दंडित करना है.
राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने ‘मॉब लिंचिंग’ और ‘ऑनर किलिंग’ जैसे जघन्य अपराध को रोकने के लिए सख्त कानून बनाया है. अब नए कानून के तहत लिंचिंग और ऑनर किलिंग गैर-जमानती अपराध हैं. दोषी को कठोर सजा भुगतनी पड़ेगी.
दरअसल, बीते मंगलवार को राजस्थान के संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने राजस्थान लिंचिंग से संरक्षण विधेयक 2019 और वैवाहिक संबंधों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक 2019 को सदन में पेश किया था.
द वायर की ख़बर के अनुसार यह विधेयक भीड़ द्वारा जाति, समुदाय, परिवार और सम्मान के नाम पर पीट-पीटकर हत्या (मॉब लिंचिंग) की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए लाया गया है. जिसमें ऐसी घटनाओं के दोषी को आजीवन कारावास (उम्रकैद) और 1 से 5 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है.
विधेयक के अनुसार मॉब लिंचिंग के मामलों में पीड़ित को चोट लगने की स्थिति में दोषी को अधिकतम 10 साल की जेल और 3 लाख रुपए तक का जुर्माना देना होगा. वहीं, मॉब लिंचिंग की घटनाओं को लेकर साजिश रचने, साजिश में शामिल होने या घटना में शामिल होने पर भी 10 साल जेल की सजा का प्रावधान होगा.
वैवाहिक संबंधों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक 2019 के अनुसार ऑनर किलिंग के लिए फांसी या आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है. जाति, समुदाय और परिवार के सम्मान के नाम पर शादीशुदा जोड़े में से किसी एक की भी हत्या करना गैर-जमानती होगा. इसके अलावा 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा.
इस विधेयक के अनुसार शादीशुदा जोड़े पर जानलेवा हमला करने वाले को 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है.
बता दें कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीते 16 जुलाई को बजट भाषण के दौरान ‘मॉब लिंचिंग’ और ‘ऑनर किलिंग’ को रोकने के लिए कानून बनाने की घोषणा की थी.
गहलोत ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य मॉब लिंचिंग और ऑनर किलिंग जैसे अपराध व हिंसा करने वाले दोषियों को गंभीर रूप से दंडित करना है. उन्होंने बताया कि विधेयक में आरोपी को मृत्युदंड देने का भी प्रावधान है और राज्य में ‘मॉब लिंचिंग’ रोकने के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का प्रावधान है.