RTI कानून को बाधा मानती है मोदी सरकार, संशोधन करके कानून को नष्ट करने की तैयारी: सोनिया गांधी
विपक्ष की आपत्ति के बावजूद सोमवार, 22 जुलाई को मोदी सरकार ने सूचना का अधिकार संशोधन विधेयक पारित किया.
यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार, 23 जुलाई को बयान जारी कर कहा है कि नरेन्द्र मोदी की भाजपा सरकार सूचना का अधिकार कानून को एक बाधा के तौर पर देखती है और इसे नष्ट करने पर तुली है.
अपने बयान में उन्होंने कहा है, “यह गंभीर चिंता की बात है कि केंद्र सरकार ऐतिहासिक सूचना का अधिकार कानून, 2005 को पूरी तरह से नष्ट करना चाहती है. यह कानून बहुत ही विचार विमर्श के बाद संसद द्वारा सर्वसम्मति से पास किया गया था, लेकिन अब यह मौत के कग़ार पर खड़ा है.”
सोनिया गांधी ने आगे लिखा है, “समाज के सबसे कमजोर तबके के लोगों ने आरटीआई कार्यकर्ताओं और अन्य की सहायता से इस कानून का सबसे अधिक फ़ायदा उठाया है.” सोनिया गांधी ने आगे कहा कि यूपीए-1 सरकार ने इस पारदर्शिता वाले कानून को लाकर भारतीय लोकतंत्र को मजबूत किया था.
आगे सोनिया गांधी ने कहा है कि सरकार के इस फ़ैसले से देश के हर नागरिक का अधिकार कमजोर होगा.
बता दें कि विपक्ष की आपत्ति के बावजूद सोमवार, 22 जुलाई को मोदी सरकार ने सूचना का अधिकार संशोधन विधेयक पारित किया. इसमें राज्य और केंद्र सरकार के सूचना आयुक्तों के कार्यकाल और वेतन को लेकर बने नियमों में बदलाव किए गए हैं. सरकार के इस फ़ैसले से इन अधिकारियों की स्वाधीनता पर असर पड़ेगा.
आरटीआई कार्यकर्ता और सतर्क नागरिक संगठन की संस्थापक अंजली भारद्वाज ने कहा है कि इस संशोधन के आने के बाद सरकार सूचना आयुक्तों पर अपना नियंत्रण स्थापित करेगी. ऐसा होने के बाद इस कानून का असल मकसद प्रभावित होगा.
The central government usurping powers to decide tenure and salaries of commissioners across the country through the RTI Amendment Bill is a clear attempt to undermine their autonomy and exercise control over them. Will be a serious blow to our fundamental RTI #DontAmendRTI pic.twitter.com/FWemZdPvTP
— Anjali Bhardwaj (@AnjaliB_) July 21, 2019
आरटीआई कानून में इस तरह के संशोधन का देशभर में विरोध हुआ है. अभी इस विधेयक को राज्यसभा में मंजूरी लेनी होगी.