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फैक्ट चेकः रोहिंग्‍या कैंप में लगी आग की पुरानी घटना नफरत भरे संदेश के साथ सोशल मीडिया पर वायरल

ऑल्ट न्यूज़ की पड़ताल

फ़ेसबूक यूज़र नेहा पटेल जो खुद को स्वामी विवेकानंद विद्यालय की ट्रस्टी बताती हैं, उन्होंने एक तस्वीर पोस्ट की है। नेहा पटेल को फ़ेसबूक पर 28 हज़ार लोग फॉलो करते हैं। तस्वीर में दिख रहे एक व्यक्ति के बारे में दावा किया गया है कि ये रोहिंग्‍या है, जिसके पास खाने के लिए कुछ नहीं है और पहनने के लिए कपड़े नहीं हैं, लेकिन तीन बीबियां और 8 बच्‍चे हैं। इतना ही नहीं, यह भी दावा किया गया है कि इसके पास 29 हज़ार रूपए का एक मोबाइल फोन भी है। इस पोस्ट को 1700 से ज़्यादा शेयर मिले हैं।

https://www.facebook.com/koolneha33/posts/10156064053842133

इस तस्वीर के साथ संदेश में लिखा है, “दिल्ली में रोड के किनारे रहने वाला एक लाचार असहाय बेसहारा गरीब #रोहिंग्या जिसके पास खाने और पहनने तक को कुछ नहीं है.बस तीन बीबियां जिसमें दो गर्भवती हैं 8 बच्चे हैं और एक सस्ता सा घटिया वाला सैमसंग 7 C7 pro मोबाइल है जिसकी कीमत मात्र 29000 रुपये है…..हमे इनका जीवनस्तर सुधारना है इसलिए समय पर टैक्स दीजिये….#चुप_रहिए_देश_में_सेक्युलरिज़्म_है”

हमने पाया कि इस तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा एक ग्राफिक के साथ भी सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है।

ट्विट्टर पर यूज़र मीरा सिंह (@meeraremi11) ने भी इसी दावे से यह तस्वीर ट्वीट की है। @meeraremi11 को केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल और निर्मला सितारमन का कार्यालय द्वारा फॉलो किया जाता है। (आर्काइव)

फ़ैक्ट-चेक

इस तस्वीर की गूगल रिर्वस इमेज सर्च करने से हमें 15 अप्रैल, 2018 को अपलोड किया गया एक लेख मिला। यह लेख एक ग्राउंड रिपोर्ट पर आधारित था, जिसके शीर्षक का हिन्दी अनुवाद है, “रोहिंग्‍या दिल्ली की आग में अपने रहने का स्थान खो बैठे, 6 साल की ज़िंदगी राख़ में बदल गयी”। इस लेख में और कई तस्वीरों के साथ यह वायरल तस्वीर भी शामिल है, जिसके साभार में देबायन रॉय का नाम था।

इस खबर के मुताबिक अप्रैल, 2018 में दिल्‍ली के मदनपुर खादर में रोहिंग्‍या शरणार्थी कैंप में अचानक से आग लग गई थी, जिससे कई झुग्गियां जलकर राख हो गई थीं। कई लोग बुरी तरह जल गए थे। हमने देबायन रॉय से संपर्क किया, जिन्होंने यह तस्वीर ली थी और इस पर ग्राउंड रिपोर्ट किया था। उन्होंने बताया, “दिल्ली के मदनपुर खादर में आग लगी थी। दारुल हिजरत, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों के लिए काम करने वाली संस्था ज़कात फ़ाउंडेशन चलाती है, यहाँ अचानक एक दिन सुबह आग लग जाती है और यह पूरा एरिया आग से जलकर राख़ हो जाता है। हम लोग वहाँ की खबर लेने पहुंचे। कुछ लोग वहाँ एक किनारे में परेशान बैठे थे। मैंने ही यह तस्वीर ली थी और अभी जो इसके साथ दावा किया जा रहा है बिलकुल गलत है। तीन पत्‍नी का दावा भी बकवास है। तस्वीर में दिख रहे व्यक्ति के दो बच्चे थे, आठ नहीं। मोबाइल भी उस शख्‍स का नहीं था। आग लगने के बाद कुछ वॉलिटियर्स वहां खाना बांट रहे थे। यह मोबाइल उन्‍हीं में से किसी एक का था, जो उन्होंने कुछ देर रखने के लिए दिया था।”

कई मीडिया संगठनों ने उस समय इस पर खबर की थी। BBC के 15 अप्रैल, 2018 को प्रकाशित ग्राउंड रिपोर्ट में लिखा है, “डीसीपी दक्षिण-पूर्व चिन्मय बिस्वाल ने बीबीसी से कहा, “आग लगने की घटना पर संबंधित धाराओं में लापरवाही का मामला दर्ज कर रहे हैं। एफ़एसल टीम और बिजली विभाग ने घटना स्थल की जांच की है। फ़ायर डिपार्टमेंट भी जांच करके रिपोर्ट जमा करेगी करेगी कि आग कैसे लगी। सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जाएगी।” द वायर की इस पर वीडियो रिपोर्ट नीचे देखी जा सकती है।

हाल ही में BBC की रिपोर्ट से ली गयी एक तस्वीर को सांप्रदायिक संदेश से शेयर किया गया था। BBC की यह रिपोर्ट म्यांमार में रोहिंग्या शरणार्थियों की दुर्दशा पर बनाई गई थी।

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