कौन कहता है कि जात-पात ख़त्म हो गया? गुजरात में दलित की बारात रोकने के लिए दबंग समाज रास्ते में बैठकर भजन करने लगा- रवीश कुमार
दलित बारात को कहा गया कि मंदिर में चुपचाप पूजा करके निकल जाएं. गरबा न खेलें. टैंकर से पानी डालकर उनके रास्ते में कीचड़ कर दिया गया.
गुजरात में पिछले तीन दिनों में दलित दूल्हे की बारात रोकने की तीन घटनाएं हुई हैं. अरविल्ली के मोदासा तालुका में खंबीसर गांव में बारात निकलने वाली थी मगर नहीं निकले दी गई. बारात रोकने के लिए दबंग समाज रास्ते में बैठकर भजन करने लगा ताकि बारात न निकल सके. पत्थर चला है. घोड़ी वाला घोड़ी छोड़ कर चला गया. पुलिस बल को भी पत्थर से चोट लगी है. गाड़ियों को नुकसान पहुंचा है. बैंड बाजा तोड़ दिया गया. दूल्हे की पगड़ी उतरवा दी गई.
बारात गांव से ही निकल सकी. अपने गांव से दूसरे गांव नहीं पहुंच सकी. तनाव के कारण शादी नहीं हो सकी. दूल्हे के पिता ने कहा है कि कल फिर बारात निकालेंगे. आज ही प्रात्जी में तनाव हुआ. दलित बारात को कहा गया कि मंदिर में चुपचाप पूजा कर निकल जाएं. गरबा न खेलें. टैंकर से पानी डालकर रास्ते में कीचड़ कर दिया इस घटना की इतनी ही जानकारी मिल पाई है.
9 मई को भी मेहसाणा के कड़ी गांव में दलित दूल्हा घोड़ी चढ़ गया. गांव वालों ने रोका कि उसे ऐसा करने का हक नहीं है. पुलिस ने गांव के सरपंच विणुजी ठाकोर को गिरफ्तार कर लिया. उसके बाद गांव के प्रमुख लोगों ने फरमान जारी किया कि जो कोई अनुसूचित जाति के दूल्हे से बात करेगा, जो दुकानदार दूध या अन्य सामाना बेचेगा उस पर 5000 जुर्माना लगेगा. इस गांव में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी लेकिन अब इसी तरह की घटना दूसरे ज़िले में हो गई.
किसी को इस पर कुछ कहना है. यही कि जात-पात ख़त्म हो गया है.
(यह लेख वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार की फ़ेसबुक पोस्ट से हू-ब-हू लिया गया है.)