मोदी ने चुनाव के 8 घंटे पहले टीवी इंटरव्यू देकर उड़ाई आचार संहिता की धज्जियां: CPI (M) नेता सीताराम येचुरी ने EC को लिखी चिट्ठी
चुनाव आयोग का नियम है कि मतदान के 48 घंटे पहले से किसी तरह का चुनाव प्रचार नहीं किया जाता है.
सीपीआई एम नेता सीताराम येचुरी ने मुख्य चुनाव अधिकारी के पास पत्र लिखकर प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. भाकपा नेता ने कहा है कि छठे चरण के मतदान के ठीक पहले प्रधानमंत्री मोदी ने टीवी इंटरव्यू में बालाकोट एयरस्ट्राइक और कश्मीर में आतंकियों को मारने की बात करके वोटरों को लुभाने की कोशिश की है.
चुनाव आयोग का नियम है कि मतदान के 48 घंटे पहले से किसी तरह का चुनाव प्रचार नहीं किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद 12 मई को होने वाली वोटिंग के एक रोज पहले टीवी चैनल न्यूज़ नेशन पर प्रधानमंत्री मोदी का इंटरव्यू प्रसारित किया गया.
अपने पत्र में सीताराम येचुरी ने लिखा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने बालाकोट में एयर स्ट्राइक जैसे संवेदनशील मुद्दे के बारे में इस साक्षात्कार में बातचीत की है.
इस पत्र में भाकपा नेता ने 12 मई को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में प्रधानमंत्री मोदी की रैली के बारे में भी जिक्र किया है. कुशीनगर में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “आज कश्मीर में हमारे जवान आतंकियों को मारते हैं. जब मोदी आतंकियों को मारता है तो कुछ लोगों को चिंता होती है कि चुनाव के समय मोदी ऐसा क्यों कर रहा है. हथियारों से लैस आतंकवादी हम पर हमला कर रहे हैं, तो क्या हमारे जवान उन आतंकियों को मारने से पहले चुनाव आयोग की अनुमति लेने जाएंगे?”
भाकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी चुनाव आयोग का मजाक बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवादी को मैंने मारा है, मोदी जी ने सेना को इसका श्रेय नहीं दिया.
उन्होंने लिखा है, “उनके (प्रधानमंत्री मोदी के) बयान व्यवहार और बयान साफ तौर पर चुनाव आयोग के दिशा निर्देशों का उल्लंघन करते हैं..चुनाव आयोग पहले ही कह चुका है कि सेना का इस्तेमाल कोई भी पार्टी वोट पाने के लिए नहीं कर सकती है.
मुख्य चुनाव अधिकारी को लिखे अपने पत्र में सीताराम येचुरी ने लिखा है, “हमने इससे पहले भी प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर आपके पास पत्र लिखा है. लेकिन ऐसा लगता है कि चुनाव आयोग के लिए श्री मोदी और अमित शाह चुनाव की प्रक्रियाओं से ऊपर हैं उनके ऊपर कोई आचार संहिता लागू नहीं होता. देश के कई कार्टूनिस्ट, अख़बारों के संपादकीय में भी यही चिंता व्यक्त की गई है.”