उत्तर प्रदेश में 15 से 20 सीटों पर सिमट सकती है BJP, डेटा वैज्ञानिक की भविष्यवाणी
भाजपा ने 2014 के चुनाव में राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 71 सीटें हासिल की थीं.
उत्तर प्रदेश में भाजपा की जमीन खिसकती नजर आ रही है. लोकसभा की कुल 80 सीटों में से इस बार भाजपा की झोली में गिनी-चुनी सीटें आने की संभावना है वहीं भाजपा के वोट प्रतिशत में भी गिरावट आने की आशंका है.
डेटा वैज्ञानिक और एन्थ्रो.एआई के सह-संस्थापक नरेंद्र नाग ने ‘द अंडरकरंट इज ऐन अर्थक्वेक’ के शीर्षक से एक विश्लेषण प्रस्तुत किया है, जो 2019 के आम चुनाव में उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के लिए व्यापक विरोधी लहर का संकेत दे रहा है.
जहां साल 2014 की आम चुनाव में भाजपा ने 71 सीटें और 41 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया था. वहीं, इस चुनाव में भाजपा की सीटों में कमीं आने की उम्मीद है.
विश्लेषण के मुताबिक, यूपी में 2019 के आम चुनाव में भाजपा को 15 से 20 सीटें मिलने की उम्मीद है. वहीं, वोट शेयर में भी 3 से 5 फीसदी की गिरावट आ सकती है. साथ ही विश्लेषण में यह भी कहा गया कि भाजपा 30 सीटें जीते इसकी संभावना बहुत कम है.
विश्लेषण के अनुसार, “भाजपा 30 सीटें जीते अब इसकी संभावना कम है और उम्मीद है कि भाजपा इस रेंज के नीचले छोर के क़रीब तक पहुंच पाएगी. वहीं, कांग्रेस के 5 से 9 सीटें जीतने की संभावना है.”
दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन 40 से 55 सीटों पर जीत हासिल कर सकता है. संभव है कि सपा-बसपा गठबंधन तकरीबन 55 सीट जीत जाएगी.

विश्लेषण में कहा गया, “पार्टी ने जितना हासिल किया है, उससे कहीं अधिक खो दिया है.”
दरअसल, भाजपा पार्टी को कम सीटें मिलने के कई कारण हैं. साल 2014 के आम चुनाव में अमित शाह ने उत्तर प्रदेश में गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलितों को लुभाने के लिए इस समुदाय के पदाधिकारियों को नियुक्त किया.
हालांकि, इसका लाभ मोदी सरकार को सत्ता में काबिज़ होने से पहले मिला था. जिसके कारण लोगों ने यह माना कि भाजपा सांसदों के पास कोई वास्तविक शक्ति नहीं है. लोगों का यह अनुमान तब और बढ़ गया जब भाजपा ने अंतिम समय में 2019 के चुनाव के लिए उम्मीदवार के तौर पर एक ठाकुर यानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम की घोषणा की.
अपने विश्लेषण में नाग ने कहा है, “हमने इस विश्लेषण के अध्ययन के दौरान राज्य में ठाकुरों का अधिक प्रभाव होने के ख़िलाफ़ नाराज़गी बढ़ती देखी. यह सच है या नहीं. यह ब्राह्मण वोट प्रतिशत को भी प्रभावित करता है.”
इसके अलावा, कुर्मी और कुशवाहा, जिन्होंने पिछले चुनाव में भाजपा को वोट दिया था. वे अब एसपी-बीएसपी के गठबंधन को मतदान किया. और “निषाद समुदाय में भी भाजपा के प्रति हल्की बगावत है.” भाजपा द्वारा अयोध्या में राम मंदिर बनाने का वादा भी सिर्फ जुमला ही रह गया. इसके कारण भी यूपी में भाजपा की छवि खराब हुई है.
विश्लेषण में बताया गया, “पार्टियों के भाग्य का फैसला करने में भी महिला मतदाताओं की भी बड़ी भूमिका है. इस मोर्चे पर, नोटबंदी जैसी नीतियों का भाजपा पर उलटा असर हुआ है. आवारा मवेशियों का मुद्दा भी महिलाओं के वोट प्रतिशत को बदल सकता है. सरकारी योजनाओं का विफल होना भी महिला मतदातओं को प्रभावित करता है.”
एन्थ्रो.एआई एक मानवविज्ञानी, गणितज्ञ, डेटा-वैज्ञानिकों और बाजार विशेषज्ञों का एक संग्रह है, जो नैतिक, मशीन आधारित सिस्टम और जटिल मानव परिदृश्यों को समझाने के लिए एक नक्शे का निर्माण करता है.