मध्यप्रदेशः पानी की किल्लत से जूझ रहे 1 दर्जन से ज्यादा गांव, ग्रामीणों ने किया चुनाव बहिष्कार का एलान
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार का एलान करते हुए ‘तालाब नहीं तो वोट नहीं’ का नारा दिया.
लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र सभी राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने क्षेत्र में बेहतर विकास का दावा कर रही हैं. लेकिन, इन दावों के बीच मध्य प्रदेश के दमोह से विकास की एक अलग तस्वीर सामने आई है. यहां के लोग लंबे समय से पानी की किल्लत से परेशान हैं जिसके चलते ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने का एलान किया है.
मूलभूत सुविधाओं और पानी की बढ़ती किल्लत से परेशान करीब 18 गांवों के मतदाताओं ने मतदान करने से साफ इनकार कर दिया है. यहां के निवासियों ने बैनर-पोस्टर के साथ नारा दिया ‘तालाब नहीं तो वोट नहीं.’
डेक्कन क्रोनिकल के ख़बर के मुताबिक, दमोह ज़िले के करीब 18 गांव के मतदाताओं ने बीते शनिवार को ज़िला कलेक्टर को पत्र सौंपा. इस पत्र में उन्होंने ज़िले के हर गांव में तालाब बनवाने की मांग रखी. ग्रामीणों ने बैनर-पोस्टर के साथ कलेक्टर ऑफिस के बाहर नारेबाजी करते हुए रोष प्रकट किया.
प्रदर्शन में शामिल सावित्री देवी ने बताया, “हमें पानी लाने के लिए घंटों चलना पड़ता है. हमारे पास इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है. क्योंकि हमारे गांव में तालाब नहीं है.”
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने बताया, “हमने दमोह सांसद प्रहलाद सिंह पटेल के सामने अपनी समस्या और मांगों को रखा था. लेकिन, कोई फायदा नहीं हुआ. अधिकारियों ने हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया. इस बार अगर हमारी मांगे पूरी नहीं हुई तो हम इस चुनाव में मतदान नहीं करेंगे.”
डेक्कन क्रोनिकल की ख़बर के मुताबिक, अपर कलेक्टर आनंद कोपरिया ने ग्रामीणों को आश्वासन देते हुए कहा है कि उनकी मांगों को जरूर पूरा किया जाएगा. एएनआई से बात करते हुए आनंद कोपरिया ने बताया, “ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए पत्र को आगे भेज दिया गया है. साथ ही इस मामले में वह ग्रामीणों से भी बात करेंगे.”
ग़ौरतलब है कि, ग्लोबल वार्मिंग के कारण लगातार सूखे और बारिश में अनियमितता के कारण राज्य का भूजल स्तर काफी प्रभावित हो गया है. मध्य प्रदेश में बीते 29 अप्रैल को चौथे चरण का मतदान संपन्न हुआ था. वहीं अगले चरणों के मतदान 6 मई, 12 मई और 19 मई को होने है.