बस खता इतनी-सी थी कि यहीं पैदा हुए और मुसलमान थे’, गौरक्षकों की भीड़ का शिकार हुए पहलू ख़ान की दास्तान.. आमिर अज़ीज़ की ज़ुबानी
‘एक तो लोग थे लोगों से दुखी, खुद से भी परेशान थे. पहलू मरते-मरते 6 लोगों का नाम ले गए. मेरा इंसाफ करना आखिरी पैगाम दे गए.’
राजस्थान के अलवर में कथित गौरक्षकों की भीड़ का शिकार हुए पहलू ख़ान की हत्या के दर्दनाक मंजर को सिंगर और यूट्यूबर आमिर अज़ीज़ ने बयां किया है.
आमिर अज़ीज़ ने ‘पहलू ख़ान की दास्तान’ नामक गाने में पहलू की हत्या से लेकर इस केस से जुड़े सभी पहलुओं से रू-बरू कराया है और इस मामले में मोदी सरकार और प्रशासन के रवैय को लेकर रोष व्यक्त किया है.
आमिर अज़ीज़ ने गाने की शुरुआत करते हुए कहा, “पहलू ख़ान बेचारे एक इंसान थे…उम्र 55 रहने वाले हिंदुस्तान के…..एक दिन एक भीड़ के हाथों नोच-नोचकर खाए गए… मेले से गाय खरीद कर लाने गए थे.”
पहलू ख़ान के पेशे और जाति के बारे में बताते हुए आमिर कहते हैं, ‘पहलू पेशे से डेयरी किसान थे. बस खता इतनी सी थी कि यहीं पैदा हुए और मुसलमान थे.’
अज़ीज़ ने घटना के वक्त आम जनता के रवैया का ज़िक्र करते हुए कहा, ‘मौके पर अनगिनत लोग मौजूद थे. कुछ विडियो बनाने मे पर मशगुल थे. कुछ डर गए और कुछ अनदेखा कर गए. कुछ खुश हुए और बाक़ियों को ये क़त्ल मक़बूल था.’
आगे पहलू ख़ान के आखिरी संदेश का जिक्र करते हुए आमिर अज़ीज़ कहते हैं, ‘एक तो लोग थे लोगों से दुखी, खुद से भी परेशान थे. पहलू मरते-मरते 6 लोगों का नाम ले गए. मेरा इंसाफ करना आखिरी पैगाम दे गए.’
पुलिस के रवैया के बारे में बताते हुए अज़ीज़ ने कहा, ‘पुलिस रात-दिन तफ्तीश करने लग गई. थाने का चक्कार काट जम्हूरियत (जनतंत्र) थक गया. मुल्क आगे बढ़ा और लोग अपने काम पर गए. पहलू क़त्ल होते लोगों के फ़ेहरिस्त (तालिका) में महज़ एक और नाम थे.’
वहीं, पहलू ख़ान के केस के रिपोर्ट को लेकर आमिर अज़ीज़ ने कहते हैं, ‘रिपोर्ट कहती है मौका-ए-वारदात पर मुलज़िम कोई भी मौजूद नहीं था. पहलू का बयान सच करे ऐसा कोई भी सबूत नहीं था.’
आमिर अज़ीज़ ने देश की कानून व्यवस्था पर करारा प्रहार करते हुए कहा, ‘हां कानून की अपनी भी कुछ मजबूरियां हैं. जालीम से कुर्बत (नज़दीकी) मजलूमों (पीड़ित) से दूरियां हैं. बेगूनाह कोई भी यहां हरगिज महफूज़ नहीं था. लोग जानवरों के मुहाफ़िज़ (रक्षक) थे और शरहदों के पासबान (द्वारपाल) थे.’
अज़ीज़ ने हिंदुस्तान की जनता और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस केस में गुनहगार बताया है, ‘अब ये मामला अदालत के सामने पड़ा है और कटघरे में सारा हिंदुस्तान खड़ा है. हां, इंसाफ करना अदालतों का फर्ज है. वल्द पहलू पे तस्करी का मुक़दमा दर्ज है. सुनते हैं मुलज़िम मंत्री जी का खास बड़ा है. वैसे तो कटघरे में हम भी, आप भी हैं, वज़ीरे आज़म (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) भी हैं.’
आमिर अज़ीज़ गाने के आख़िरी लाइनों में कहते हैं, ‘पहलू ख़ान तो बेचारे तदफीन हो गए. मिट्टी में मिले मिलकर ज़मीन हो गए. जो ज़िंदा हैं हालत उनकी ख़राब है. तीस्नगी (लालसा) को हासिल शराब है और इस वक्त जो मैं आपको पहलू की दास्तान गा रहा हूं. वहीं से आया हूं मैं वापस कब्रिस्तान जा रहा हूं. उस सुनसान सड़क पर एक दूसरा पहलू ख़ान खड़ा है. आ रही मुसिबतों से बेबस अनजान खड़ा है.”
बता दें कि हरियाणा के जयसिंहपुर गांव के निवासी पहलू ख़ान को 1 अप्रैल 2017 में राजस्थान के अलवर में कथित गोरक्षकों की भीड़ ने बेरहमी से पिटाई की थी. इलाज के दौरान पहलू ख़ान ने दम तोड़ दिया था. हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक पुलिस की जांच रिपोर्ट में पहलू की हत्या के 6 आरोपियों में से 3 एक दक्षिणपंथी हिंदू संगठन से जुड़े थे.
आमिर अज़ीज़ के इस गाने को अब तक करीब 3 हज़ार से अधिक लोगों ने देख चुक हैं.