वाराणसी: PM मोदी के संसदीय क्षेत्र में पीने के पानी की किल्लत, नाराज़ लोग करेंगे चुनाव का बहिष्कार, ‘नोटा’ दबाने का लिया फ़ैसला
पीएम मोदी के रोड शो के लिए वाराणसी की सड़कों को साफ़ करने के लिए करीब 1.4 लाख लीटर पीने का पानी बर्बाद किया गया था.
प्रधानमंत्री मोदी ने बीते गुरुवार को वाराणसी लोकसभा सीट से अपना नामांकन दाखिल किया. इस दौरान पीएम मोदी के रोड शो के लिए हजारों लीटर पानी सड़कों पर बहाया गया. लेकिन दूसरी तरफ राज्य के लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं.
वाराणसी के सरायनंदन वार्ड के पंडिताना मोहल्ले में पेयजल की समस्या को लेकर लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. आंदोलन कर रहे लोगों ने पानी की समस्या का समाधान न होने पर सभी राजनैतिक दलों का बहिष्कार करने और नोटा का बटन दबाने का फ़ैसला किया है.
सबरंग इंडिया की ख़बर के मुताबिक पानी के लिए प्रदर्शन रही अनीता बिंद ने कहा, “पंडिताना मोहल्ले में पिछले 7 सालों से पानी की समस्या है. नेताओं और जल विभाग के चक्कर काटने के बाद 2 साल पहले मोहल्ले में पानी का कनेक्शन लगा लेकिन उसमें आज तक पानी नहीं आया. स्थानीय लोग कुंए का पानी पिने के लिए मजबूर हैं जो गर्मियों में बदबूदार हो जाता है.”
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि लोगों को पानी नहीं मिल रहा है ऊपर से पानी की पाइपों को नट लगाकर बंद कर दिया गया है. लेकिन, सरकार पिछले 2 सालों से लगातार पानी का टैक्स वसूल रही है.
ग़ौरतलब है कि मोहल्ले के लोगों ने कई बार स्थानीय पार्षद व विधायकों से अपनी समस्या को लेकर बात की है. लेकिन, हर बार उन्हें सिर्फ समस्या हल करने का झूठा आश्वासन दे दिया जाता है.
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वह कई बार पानी की समस्या को लेकर धरना प्रदर्शन भी कर चुके हैं. लेकिन नेताओं व अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ता है. इसलिए इस बार विरोध जताने के लिए स्थानीय लोगों ने चुनाव बहिष्कार का फैसला लिया है.
सबरंग इंडिया अनुसार, प्रदर्शन में मौजूद क्रांति फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ई. राहुल सिंह ने कहा, “भयंकर गर्मी मे पीने के पानी के लिए जनता को संघर्ष करना पड़ रहा है यह नेताओं व प्रशासन के लिए शर्मनाक है.”
उन्होने कहा, “नोटा आम जनता के विरोध का एक तरीका है जिसका उपयोग जनता को करना चाहिए. राजनैतिक दलों को यह समझना पड़ेगा कि पांच सालों में मात्र वोट देना जनता का दायित्व नहीं बनता. यदि नेता काम नहीं करेंगे तो जनता नोटा का इस्तेमाल करेगी. नोटा के इस्तेमाल से राजनैतिक दलों पर बेहतर व पारदर्शी तरीके से कार्य करने का दबाव बढ़ेगा.”
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