मोदी राज में रोज़गार का हाल बेहालः लगातार कम हो रही हैं नौकरियां, हर महीने औसतन 26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज- EPFO डेटा
मार्च 2018 में 55,934 नौकरियों की गिरावट दर्ज की गई.
मोदी सरकार के कार्यकाल में रोज़गार की गति लगातार धीमी पड़ रही है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक संगठित क्षेत्र में रोज़गार सृजन में अक्टूबर 2018 से अप्रैल 2019 तक हर महीने लगभग 26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.
ग़ौरतलब है कि साल 2017-18 में NSSO की रिपोर्ट में बेरोज़गारी दर 6.1 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी. हालांकि पीएम मोदी अक्सर नौकरी सृजन का दावा करने के लिए ईपीएफओ डेटा का हवाला देते रहे हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स के साथ एक साक्षात्कार में, उन्होंने कहा कि ईपीएफओ और ईएसआईसी के आंकड़ों के अनुसार, हमने हर महीने 1 मिलियन नौकरियां और हर साल 12 मिलियन नौकरियां पैदा की हैं. पिछले 4 वर्षों में, 5.5 मिलियन नए ग्राहक एनपीएस (पेंशन योजना) में शामिल हो गए हैं. लगभग 10 मिलियन लोग रोजगार सृजन कार्यक्रमों से फायदा उठा रहे हैं ”
लेकिन ईपीएफओ डेटा एक अलग कहानी बताता हैः
बिजनेस टुडे की रिपोर्ट में सितंबर 2017 से फरवरी 2019 तक ईपीएफओ द्वारा जारी रोज़गार सृजन के डेटा का अध्ययन किया गया है.
बीते साल अक्टूबर में जारी किए गए आंकड़ों की माने तो (सितंबर 2017 से अगस्त 2018) के बीच सिर्फ 6.10 लाख प्रति महीने नए रोजग़ारों का सृजन हुआ है. लेकिन दिसंबर 2018 में जारी आंकड़ों के मुताबिक रोज़गार सृजन लुढ़ककर 5.65 लाख प्रति महीने पर पहुंच गया.
वहीं अगर ईपीएफओ द्वारा जनवरी 2019 में जारी किए आंकड़ों को देखे तो (सिंतबर 2017 से नवंबर 2018) के बीच नए रोज़गार का सृजन 4.90 लाख प्रति माह पहुंच गया. वहीं फरवरी 2019 के आंकड़ों के मुताबिक (सितंबर 2017 से दिसंबर 2018) के बीच रोज़गार के अवसर गिरकर 4.52 लाख प्रति माह के स्तर पर पहुंच गए. मार्च 2019 में जारी आंकड़ों के अनुसार (सितंबर 2017-नवंबर 2018) में रोज़गार सृजन लुढ़कर 4.50 लाख प्रति महीने हो गया.
मार्च 2019 के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2017 से जनवरी 2019 की अवधि में 4,49,935 लाख प्रति माह नए रोज़गारों का सृजन हुआ है. लेकिन फरवरी 2019 के नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि सितंबर 2017 से फरवरी 2019 के बीच रोज़गार सृजन लुढ़कर 4,49,261 प्रति माह पर पहुंच गया है.
इस हिसाब से अक्टूबर 2018 के बाद रोज़गार सृजन में लगभग 26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.
सितंबर 2017 से जनवरी 2019 के बीच आंकड़ों की तुलना करें तो 17 महीनों में तकरीबन 4,23,897 नौकरियों में गिरावट देखी गई है. दिसंबर 2018 में सबसे ज्यादा 69,470 (9.8 प्रतिशत) की गिरावट दर्ज की गई थी.
वहीं नवंबर 2018 में 55,299 (10.7 प्रतिशत) और अक्टूबर 2018 में 35,449 (6.8 प्रतिशत) की गिरावट आई है. अकेले मार्च 2018 में 55,934 नौकरियों की गिरावट दर्ज की गई.
नौकरियाः
मार्च 2019 में जारी ईपीएफओ की रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2017 से दिसंबर 2018 के बीच देशभर में 76.48 लाख लोगों को रोज़गार मिला है.
इस साल फरवरी में 8,61,701 नौकरियों का सृजत हुआ. जिसमें 22-25 वर्ष की आयु के युवाओं में, 2.36 लाख लोगों के लिए औपचारिक रोज़गार पैदा हुए. वहीं 29-35 वर्ष की आयु के लोगों के लिए, 1.54 लाख रोज़गार सृजित किए गए. 35 साल से ऊपर के आयुवर्ग के लोगों के लिए 1.43 लाख नौकरियों का सृजन हुआ.
हालांकि नए आंकड़ें मोदी सरकार के लिए मुसीबतें खड़ी कर सकते हैं.