एयर स्ट्राइक के नाम पर वोट मांगना ग़लत, इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश के नाम पर कभी नहीं मांगे वोट: सेना के पूर्व प्रमुख जनरल चौधरी
पूर्व सेना प्रमुख ने कहा, “बालाकोट एयर स्ट्राइक के नाम पर वोट मांगना बहुत ग़लत है. मतदाताओं के पास पुलवामा आतंकी हमले का जिक्र नहीं करना चाहिए.”
पूर्व सेना प्रमुख जनरल शंकर रॉय चौधरी ने सेना के राजनीतिकरण को लेकर प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि जिस तरह से पुलवामा हमले का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है, वह निंदनीय है.
- द टेलीग्राफ से बात करते हुए पूर्व सेना प्रमुख ने कहा, “बालाकोट एयर स्ट्राइक के नाम पर वोट मांगना बहुत ग़लत है. मतदाताओं के पास पुलवामा आतंकी हमले का जिक्र नहीं करना चाहिए. अगर यह चुनाव में मुद्दा होता तो लोग खुद इसकी चर्चा करते. मुझे याद नहीं कि इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश के नाम पर वोट मांगे हों. लेकिन, फिर भी उन्हें इसका लाभ मिला. बांग्लादेश बनाने का फायदा चुनाव में जरूर उन्हें मिला. युद्ध या संघर्ष का असर ऐसा होता है. सरकार को संघर्ष के समय या उसके बाद धैर्य बनाए रखना होता है.
- उन्होंने आगे कहा, “बांग्लादेश बनने के बाद बेशक इंदिरा गांधी की लोकप्रियता बढ़ी थी. कांग्रेस पार्टी ने नि:संदेह इसका लाभ लिया. जो पार्टी सत्ता में होती है, उसे ही संघर्ष में जीत का लाभ मिलता है. संघर्ष में हार का ठीकरा भी सत्ताधारी दल को ही मिलता है.”
- मौजूदा परिस्थिति पर सवाल पूछने पर जनरल राय चौधरी ने कहा, “आज भाषा बुरी हो गई है. इस तरह की भाषा कभी नहीं सुनी गई. इंदिरा गांधी के समय तो कम से कम इस तरह की भाषा नहीं बोली गई थी. आज जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसे सुनकर बहुत बुरा लगता है.”
- उन्होंने आगे कहा, “दुर्भाग्यवश आज कुछ लोगों की भाषा ख़राब हो गई है. रामजादा और हरामजादा जैसे शब्द का प्रयोग किया जा रहा है. यह कैसा लगता है. अनपढ़ों की भाषा का इस्तेमाल हो रहा है. लेकिन, आज इस तरह की भाषा कुछ नेताओं द्वारा बोली जा रही है.”
बता दें कि जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों के काफ़िले पर फिदायीन हमले में तीन दर्जन से ज्यादा जवानों की मौत हो गई थी. इसके बाद वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक किया. भारतीय जनता पार्टी के तमाम नेता और खुद प्रधानमंत्री मोदी अपने चुनावी रैलियों में इस एयर स्ट्राइक के नाम पर वोट मांग रहे हैं. हालांकि चुनाव आयोग ने पहले ही सेना के नाम पर वोट ना मांगने का आदेश दे दिया है.
(पूरा साक्षात्कार द टेलीग्राफ पर पढ़ें.)