सेना के पूर्व उप प्रमुख लेफ़्टिनेंट जनरल एम एल नायडू ने कहा- “मैंने कभी नहीं कहा कि राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी पर मैंने दस्तख़त नहीं किए थे.”
समाचार एजेंसी ANI ने सेना के पूर्व अधिकारी के बयान को लेकर चलाई झूठी ख़बर, सेना के अधिकारी बोले- घृणित और छलपूर्ण
समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा सेना के पूर्व उप प्रमुख लेफ़्टिनेंट जनरल एम एल नायडू के बयान को ग़लत तरीके से पेश करने का मामला सामने आया है. नायडू ने सेना के कई पूर्व अधिकारियों के साथ एक साझा चिट्ठी लिखी थी, जिसमें देश के राष्ट्रपति से मांग की गई थी कि राजनीति के लिए सेना का इस्तेमाल करने पर रोक लगाई जाए.
शनिवार को एएनआई ने एम एल नायडू को उद्धृत करते हुए लिखा, “नहीं, इस प्रकार की किसी भी चिट्ठी के लिए मुझसे सहमति नहीं ली गई और मैंने ऐसी कोई चिट्ठी लिखी ही नहीं है.”
बता दें कि हाल ही में सेना के आठ पूर्व प्रमुखों के साथ 150 से ज्यादा अधिकारियों ने राष्ट्रपति के पास पत्र लिखकर प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं द्वारा राजनीति के लिए सेना का इस्तेमाल करने पर आपत्ति जताई थी. इसमें सेना की कार्रवाई का श्रेय नेताओं द्वारा लिए जाने को लेकर भी कड़ी आपत्ति जताई गई थी.
शनिवार को एएनआई ने सेना के पूर्व अधिकारियों की चिट्ठी पर ही सवाल खड़े कर दिया.
Former Army Vice Chief Lt General ML Naidu( who is mentioned at 20th in the list of armed forces veterans who purportedly wrote letter to President): No, my consent has not been taken for any such letter and neither have I written any such letter. (file pic) pic.twitter.com/v8H35Hp2WN
— ANI (@ANI) April 12, 2019
न्यूज़सेंट्रल24X7 को एक ईमेल प्राप्त हुआ है, जिसके मुताबिक नायडू ने अपने सहयोगी और सेना के पूर्व अधिकारियों को कहा है कि मीडिया में झूठी ख़बर फैलाई जा रही है कि नायडू ने राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी को अपना समर्थन नहीं दिया था.
मेजर जनरल (रि) एसजी वोमबटकेरे को लिखी चिट्ठी में उन्होंने कहा है, “विजुअल मीडिया खासकर एएनआई द्वारा प्रचारित किया जा रहा है कि मैंने कुछ बयान दिया है. किसी ने मेरे से कॉन्टैक्ट नहीं किया था. दोपहर में एएनआई वाले मेरे पास बयान लेने के लिए आए. मैं एएनआई को दिए अपने बयान इस मेल के साथ अटैच कर रहा हूं.”
https://twitter.com/nc24x7/status/1117079436883398656
न्यूज़सेंट्रल24X7 को जो क्लिप प्राप्त हुआ है, उसमें पूर्व लेफ़्टिनेंट जनरल और एएनआई संवाददाता की बातचीत है. इस पूरी बातचीत में नायडू ने कहीं भी नहीं कहा है कि उन्होंने राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी में अपनी सहमति नहीं दी थी. इसके साथ ही लेफ़्टिनेंट जनरल (रि) नायडू ने वोमबटकेरे को कहा है, “सुप्रीम कमांडर राष्ट्रपति रामनाथ कोबिंद जी को लिखी चिट्ठी को मैं अपना समर्थन दे रहा हूं.”
डेली ओ वेबसाइट के रोहित डेविड के साथ साक्षात्कार में ले. जनरल नायडू ने कहा है, राष्ट्रपति को जो चिट्ठी लिखी गई है, उसमें सिर्फ सेना के राजनीतिकरण की बात कही गई है. इसके अलावा उसमें किसी प्रकार की चर्चा नहीं की गई है. मैंने इसे अपना समर्थन दिया है, और मैं अब भी इसे समर्थन दे रहा हूं.”
इससे एएनआई के झूठ की पोल खुल जाती है, जिसने नायडू के बयान को ऐसे लिखा था- इस प्रकार की किसी भी चिट्ठी के लिए मुझसे सहमति नहीं ली गई थी.
रिटायर्ड एडमिरल लक्ष्मीनारायण रामदास को लिखे पत्र में मेजर जनरल (रि) ने एएनआई की रिपोर्ट को छलपूर्ण बताया है.
मेजर (रि) प्रियदर्शी चौधरी ने ईमेल के जरिए इस पूरे मामले में लिखा है, “यह बहुत ही हैरान करने वाला वाकया है. अपने राजनीतिक आकांक्षाओं के लिए ये लोग किसी भी हद तक गिर सकते हैं.”
बता दें कि राष्ट्रपति को लिखे अपने पत्र में सेना के पूर्व अधिकारियों ने कहा था कि आम चुनाव में आदर्श आचार संहिता को धता बताते हुए राजनीतिक दल सेना के काम का श्रेय लेकर राजनीति कर रहे हैं.
इसके अलावा सेना के पूर्व अधिकारियों ने राष्ट्रपति से मांग की थी कि वह अपने स्तर से सुनिश्चित करें कि इस चुनाव में सेना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी करने से नेता बाज आएंगे.