सेना को खुली छूट मिलना नई बात नहीं, हमेशा से स्वतंत्र रहे हैं जवान: सर्जिकल स्ट्राइक के हीरो डी एस हुड्डा
सेना को राजनीतिक फ़ायदे के लिए अभी तक इस्तेमाल नहीं किया गया है.
सेना को बॉर्डर पार स्ट्राइक करने के लिए खुली छूट देने का दावा मोदी सरकार करती है. लेकिन, सेना के लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डी एस हुड्डा का कहना है कि सेना को हमेशा से ऐसी खुली छूट मिलती रही है.
डी एस हुड्डा शुक्रवार को गोआ के एक कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे.
उनका कहना है, “मौजूदा सरकार सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक करने का आदेश देकर राजनीतिक लाभ कमाना चाहती है, लेकिन असलियत यह है कि सेना को हमेशा से खुली छूट मिलती रही है.”
उन्होंने आगे कहा, “अभी सेना को खुली छूट देने की बात की जाती है, लेकिन सच है कि 1947 के बाद से ही कभी भी सेना के हाथ बांध कर नहीं रखे गए. तब से सेना ने 3-4 युद्ध लड़ा है.”
उन्होंने आगे कहा, “देश की सीमा सबसे ख़तरनाक जगह होती है, आपके ऊपर हमले हो सकते हैं और उस समय ग्राउंड पर मौजूद जवान को त्वरित कार्रवाई करनी पड़ती है. उस समय सेना को हमारे आदेश की जरूरत नहीं होती. उन जगहों पर सेना को खुली छूट मिली रहती है, इसके अलावा कोई उपाय हो ही नहीं सकता.”
डी एस हुड्डा ने उन लोगों के प्रति भी नाराज़गी व्यक्त की, जो सेना की कार्रवाई का सबूत मांगते हैं.
उनका कहना है, “सेना के वरिष्ठ अधिकारियों पर कृपया भरोसा बनाए रखिए. अगर मिलिट्री ऑपरेशन के डायरेक्टर जनरल खुद आकर कहते हैं कि हमने सर्जिकल स्ट्राइक की है, तो हमें इस बात पर किसी भी सूरत में शक नहीं करनी चाहिए.”
उनका कहना है कि सेना को राजनीतिक फ़ायदे के लिए अभी तक इस्तेमाल नहीं किया गया है.
उनका कहना है, “ईमानदारी से बताएं तो यह सही है कि कभी भी सेना के ऊपर राजनीतिक पार्टियों का दबाव नहीं रहा है. हमें कोई भी नहीं कहता है कि सीमा पर किस तरह से दुश्मन को जवाब दें”
इस प्रकार इन्हें राजनीतिक दबाव नहीं कहा जा सकता है.
लेफ्टिनेंट जनरल डी एस हुड्डा नॉर्दन आर्मी के कमांडर रह चुके हैं. फिलहाल वे राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कांग्रेस की टास्क फोर्स टीम की जिम्मेदारी देख रहे हैं.