मोदी राज में बैंकों के खस्ता हालात, कर्ज वसूलने में नाकाम होने पर 5 लाख करोड़ से ज्यादा रकम को कहा अलविदा
बीते 10 सालों में बैड लोन का 80 प्रतिशत हिस्सा मोदी सरकार के कार्यकाल में राइट ऑफ किया गया है.
एक तरफ सरकार बैंकों को डूबने से बचाने के लिए टैक्सदाताओं के पैसे से उन्हें पूंजी उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है. वहीं दूसरी तरफ बैंकों ने लोन न लौटाने वालों के कर्ज को ठंडे बस्ते यानी राइट ऑफ (अलविदा) कर दिया है. यहां राइट ऑफ श्रेणी से मतलब ऐसा लोन जिसे वसूलना लगभग नामुमकिन होता है और बैंक उस रकम को बैंलेस शीट से हटा देते हैं.
रिजर्व बैंक ने खुलासा करते हुए बताया, “दिसंबर 2018 तक खत्म हुई तीसरी तिमाही तक बैंकों ने 1,56,702 करोड़ के बैड लोन को राइट ऑफ श्रेणी में डाल दिया. ऐसे में पिछले 10 सालों में बैंकों ने करीब 7 लाख करोड़ के बैड लोन को राइट ऑफ श्रेणी में डाल दिया है.
चौंकाने वाली बात यह है कि बीते 10 सालों में बैड लोन का 80 प्रतिशत हिस्सा मोदी सरकार के कार्यकाल में राइट ऑफ किया गया है.
जनसत्ता के मुताबिक इंडियन एक्सप्रेस के द्वारा दाखिल आरबीआई के जवाब में बताया गया कि अप्रैल 2014 के बाद से राइट ऑफ किए गए लोन की कुल रकम तकरीबन 5,55,603 करोड़ रुपए है. बैड लोन की रकम कम दिखाने के लिए बैंकों ने साल 2016-17 में 1,08,374 करोड़ और साल 2017-18 में 161,328 करोड़ के कर्ज को राइट ऑफ किया है.
वहीं साल 2018-19 के शुरुआती 6 महीनों में 82,799 करोड़ रुपए रकम राइट ऑफ की गई. अक्टूबर से दिसंबर 2018 की तिमाही में 64,000 करोड़ की रकम को ठंडे बस्ते में डाला गया.
बैंकों का दावा है कि वे राइट ऑफ के बावजूद रकम की रिकवरी का प्रयास जारी रखते हैं, हालांकि सूत्रों की माने तो राइट ऑफ के बाद 15 से 20 फीसदी से ज्यादा रकम की रिकवरी नहीं हो पाती है.