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राफ़ेल घोटाले में नया खुलासा: मोदी सरकार ने नियमों के साथ की थी छेड़छाड़, फ्रांस की कंपनी को पहुंचाया मुनाफ़ा

द हिंदू के अनुसार राफ़ेल सौदे में दसॉल्ट एविएशन और एमबीडीए को दी गई छूट के कारण कई नियमों का उल्लंघन हुआ है.

राफ़ेल घोटाले को लेकर आज एक नई सच्चाई सामने आई है. द हिंदू में एन. राम की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट को असाधारण और अभूतपूर्व छूट दी गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन्हीं छूटों की वजह से 2013 के रक्षा समझौते का पालन नहीं किया गया.

द हिंदू के अनुसार राफ़ेल सौदे में दसॉल्ट एविएशन और एमबीडीए को दी गई छूट के कारण कई नियमों का उल्लंघन हुआ है. हम यहां द हिन्दू की रिपोर्ट से जुड़े अहम तथ्यों को बिंदुवार समझेंगे.

  • इस छूट के चलते ही फ्रांस की इन दोनों कंपनियों (दसॉल्ट एविएशन) ने रक्षा संस्करण प्रक्रिया, 2013 के प्रावधानों का पालन नहीं किया. उन्हें इन प्रावधानों के उल्लंघन की छूट शीर्ष स्तर से मिली.
  • इस सौदे में रक्षा प्रसंस्करण प्रक्रिया-2013 के अनुच्छेद 9 और अनुच्छेद 12 का उल्लंघन हुआ है. अनुच्छेद 9 ऑफसेट समझौते में मध्यस्थता का प्रावधान करता है.
  • अनुच्छेद 12 के तहत औद्योगिक आपूर्तिकर्ताओं के खातों को देखा जा सकता है.
  • इन दोनों प्रावधानों के उल्लंघन को अंतिम तौर पर मंजूरी तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद् (डीएसी) से मिली. हालांकि, ऐसा करते हुए रक्षा मंत्री सहज नहीं थे. द हिंदू ने इसके कुछ कागज़ात कुछ दिनों पहले सार्वजनिक किए थे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैबिनेट सुरक्षा समिति के दखल के चलते दो अन्य गंभीर  प्रावधानों का भी उल्लंघन हुआ.

  1. मानक खरीद प्रक्रिया के तहत रक्षा समझौते में किसी भी तरह के ‘अनुचित प्रभाव’ और ‘एजेंट कमीशन’ पर प्रतिबन्ध लगाया गया था.
  2. इसी अनुच्छेद में मानक प्रक्रियाओं का उल्लंघन करने के लिए आपूर्तिकर्ताओं पर दंड लगाने का भी प्रावधान था.

ऐसे में अंग्रेजी दैनिक द हिंदू के मुताबिक, रक्षा अधिग्रहण परिषद् ने ऑफसेट समझौते से ये प्रावधान चुपचाप हटा लिए.

  • जब सुप्रीम कोर्ट इस बाबत जवाब मांगा तब केंद्र सरकार ने ऑफसेट समझौते में हुई इस छेड़छाड़ की बात को छिपा ली.
  • द हिन्दू ने लिखा है कि अगस्त 2015 में ऑफसेट नीति में चालाकी से किए गये  बदलावों का खुलासा 21 जुलाई, 2016 की तारीख वाले भारतीय खरीद दल की अंतिम रिपोर्ट से होती है.

राफ़ेल सौदे पर द हिन्दू ने सभी तथ्यों और दस्तावेजों को सार्वजनिक कर यह लिखा है कि इस सौदे में स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्तर पर हस्तक्षेप कर खरीद प्रक्रिया में दखल दिया है.

इस सौदे से अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा इसमें छेड़छाड़ की गई, जिससे यह साबित होता है कि ऑफसेट समझौता में अपने अनुसार बदलाव कर केंद्र की मोदी सरकार ने दसॉल्ट एविएशन  को असाधारण फायदा पहुंचाया.

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