150 से ज़्यादा वैज्ञानिकों की अपील- लोकतांत्रिक अधिकारों को बचाने के लिए उन लोगों को वोट न दें जो लोगों की हत्या करते हैं
“हमारे युवाओं के लिए ऐसा भविष्य नहीं हो सकता जहां बुद्धिजीवियों या तर्कवादियों को परेशान किया जा रहा हो.”
कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, लेखकों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि इस बार का चुनाव कोई आम चुनाव नहीं है. यह चुनाव भारत में लोकतंत्र के बुनियाद को ज़िंदा रखने के लिए है. यह चुनाव निजी स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति का है. सच और झूठ का है.
इसीलिए बुद्धिजीवियों ने अलग-अलग फ़ोरम से यह अपील करना शुरू कर दिया है कि लोग समझदारी से, तथ्यों और सबूतों को समझकर ही वोट करें.
इस अपील में वैज्ञानिकों का नाम भी जुड़ गया है. 150 से ज़्यादा वैज्ञानिकों ने जनता से अपील करते हुए कहा है कि “लोग आपसी एकता के लिए वोट करें. तर्क और आपसी विचार के लिए वोट करें.”
वैज्ञानिकों ने अपने प्रेस विज्ञप्ति में लिखा है कि “लोकतांत्रकि अधिकार को बचाने के लिए उनलोगों को खारिज करना होगा जो लोगों की हत्या करते हैं. जो लोगों से धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर नफ़रत करते हैं. हमें उन्हें राजनीतिक समर्थन नहीं देना है जो सिर्फ जीतने के लिए हमें बांटते हैं. दलित, आदिवासी, महिलाओं और अल्पसंख्यकों का शोषण करते हैं. विविधता ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है. भेदभाव और पक्षपात इसके बुनियादी जड़ों पर हमला करता है.”
तर्कवादियों को निशाना बनाए जाने को लेकर वैज्ञानिकों ने कहा कि “हमारे युवाओं के लिए ऐसा भविष्य नहीं हो सकता जहां बुद्धिजीवियों या तर्कवादियों को परेशान किया जा रहा हो. या उनकी हत्या भी कर दी जा रही हो. हमें ऐसे देश के रूप में उठना होगा जो विज्ञान को आर्थिक एंटरप्राइज के तरह नहीं बल्कि इसे खुले दिमाग से सवाल करके लोकतंत्र को सशक्तिकरण के रूप में देखा जाना चाहिए. हमें समझ और तथ्यों पर हो रहे हमलों को रोकना होगा, क्योंकि यहीं एक ज़रिया है जिससे शिक्षा, रोज़गार और शोध के लिए मौक़े ईजाद कर सकते हैं.”
वैज्ञानिकों ने जनता को वोट देने की अपील करते हुए कहा कि विज्ञान के प्रति हमारी संविधान की प्रतिबद्धता को याद रखें. अपने समझ, तथ्य और सबूतों की समीक्षा कर ही वोट डालें.