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शर्मनाक: OIC ने भारत के ख़िलाफ़ पास किया प्रस्ताव, कश्मीर को “भारत अधिकृत कश्मीर” बताया

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ओआईसी की बैठक में हिस्सा लेने अबू धाबी गई थीं.

इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) ने जम्मू-कश्मीर में अशांति के लिए भारत की आलोचना की है. इस संगठन ने कश्मीर के मौजूदा हालातों पर भारत की आलोचना करते हुए एक प्रस्ताव पास किया है, जिसमें “भारतीय आतंकवाद” जैसा नया शब्द दिया गया है. इसे भारत की कूटनीतिक विफ़लता के तौर पर देखा जा रहा है. हाल ही में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ओआईसी की बैठक में हिस्सा लेने गई थीं.

शनिवार को पाकिस्तान के अधिकारियों ने इसकी जानकारी साझा की है कि अबू धाबी में सीआईओ ने एक प्रस्ताव पास किया है, जिसमें कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन किया गया है.

पाकिस्तान ने कहा है, “क्षेत्र में मौजूदा अस्थिर हालात के संदर्भ में, ओआईसी के सदस्य देशों ने पाकिस्तान की ओर से लाए प्रस्ताव को स्वीकार किया. इसमें भारत द्वारा पाकिस्तान हवाई क्षेत्र के उल्लंघन पर गहरी चिंता जताई गई है. पाकिस्तान के आत्मरक्षा के अधिकार की पुष्टी की गई है और भारत से धमकाने या ताकत के इस्तेमाल पर संयम बरतने का अनुरोध किया गया है.”

इसके अलावा ओआईसी के प्रस्ताव में, जम्मू-कश्मीर को “भारत के कब्जे वाला जम्मू-कश्मीर” बताया है. इस प्रस्ताव में कश्मीर में कथित मानवाधिकार हनन के मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त की. ओआईसी ने भारत अधिकृत जम्मू-कश्मीर के लोगों को समर्थन दिया और क्षेत्रीय शांति के लिए लंबित मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत के जरिए हल करने की अपील की.

बता दें कि ओआईसी मुस्लिम बहुल 57 देशों का संगठन है. सुषमा स्वराज ओआईसी के बैठक में भाग लेने वाली पहली भारतीय मंत्री हैं. सुषमा ने ओआईसी के संबोधन में लगभाग 17 मिनट तक भाषण दिया था. जिसमें उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान के ऊपर निशाना साधते हुए कहा था कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी भी धर्म के खिलाफ़ नहीं है और ऐसा हो भी नहीं सकता है. उन्होंने कहा था कि इस्लाम का मतलब अमन है. इसी तरह दुनिया के सभी धर्म शांति, करूणा और भाईचारे का संदेश देते हैं. आतंक को संरक्षण और पनाह देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. क्योकिं इस्लाम शांति सिखाता है.

पत्रकार सुहासिनी हैदर के मुताबिक विदेश मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर पर ओआईसी के बयान को खारिज किया है. विदेश मंत्रालय का कहना है, “जम्मू और कश्मीर के प्रस्तावों के संबंध में, हमारा रुख स्पष्ट है और यह सब जानते हैं. जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और यह भारत का आंतरिक मामला है.”

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