पाकिस्तान की पानी सप्लाई रोकने का फ़ैसला नया नहीं है, भ्रम फ़ैला रहे नितिन गडकरी
जल संसाधन की एडीजी नीता प्रसाद ने कहा, “नदी के विकास और गंगा के कायाकल्प के लिए यह कदम उठाया गया है. यह कोई नया निर्णय नहीं है. यह फैसला पहले ही लिया जा चुका है, जिसे फिर से दोहराया जा रहा है.”
गुरुवार शाम केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी के ट्वीट ने हंगामा मचा दिया. ट्वीट में नितिन गडकरी ने लिखा था, “ पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार ने निर्णय लिया है कि हम पाकिस्तान को दिए जाने वाले अपने हिस्से के पानी को रोकेंगे. इस पानी को सप्लाई के जरिए जम्मू-कश्मीर और पंजाब के लोगों के लिए भेजा जाएगा.”
The construction of dam has started at Shahpur- Kandi on Ravi river. Moreover, UJH project will store our share of water for use in J&K and the balance water will flow from 2nd Ravi-BEAS Link to provide water to other basin states.
— Nitin Gadkari (@nitin_gadkari) February 21, 2019
इस खबर को पुलवामा आतंकी हमले से जोड़ कर देखा जाने लगा. जब तक कि जांचकर्ताओं ने यह नहीं बताया कि उरी हमले के बाद भी भारत ने ऐसा ही कहा था. जांचकर्ताओं का कहना है कि ट्वीट में किसी भी तरह से सिंधु जल संधि को तोड़ने का संकेत नहीं दिया गया है. 1960 के इस जल संधि के तहत पश्चिम की नदियां सिंधु, झेलम और चेनाब का जल पाकिस्तान को दिया गया है.
बता दें कि नितिन गडकरी का यह ट्वीट तब आया जब भाजपा सरकार व पीएम नरेंद्र मोदी की पुलवामा हमले के प्रति उनकी उदासीनता की आलोचना की जा रही थी. कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार को आरोप लगाया कि जब देश इस हमले की वजह से सदमे में था, तब उस वक्त पीएम मोदी जिम कार्बेट पार्क में एक प्रचार फिल्म की शूटिंग कर रहे थे.
इसके बाद एक अन्य ट्वीट में गडकरी ने कहा कि, “रावी नदी पर शाहपुर कांडी बांध का निर्माण शुरू हो गया है. इसके अलांवा यूजेएच परियोजना के जरिए जम्मू-कश्मीर में उपयोग के लिए हमारे हिस्से के पानी का भंडारण होगा और शेष पानी दूसरी रावी व्यास लिंक के जरिए अन्य राज्यों के बेसिन में प्रवाहित होगी.” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इन सभी परियोजनाओं को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जा चुका है.
इस मामले पर जल संसाधन की एडीजी नीता प्रसाद ने कहा, “नदी के विकास और गंगा के कायाकल्प के लिए यह कदम उठाया गया है. यह कोई नया निर्णय नहीं है. यह फैसला पहले ही लिया जा चुका है, जिसे फिर से दोहराया जा रहा है.”
दरअसल, 19 सितंबर 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि के तहत फै़सला किया गया कि सिंधु घाटी की पूर्वी नदियां रावी, सतलज और व्यास का पूरा पानी भारत को मिलेगा. वहीं पश्चिमी नदियां सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी बिना किसी गतिरोध के पाकिस्तान को मिलेगा. चूंकि भारत, पकिस्तान के मुकाबले ऊंची जगह पर है, ऐसे में पूर्वी नदियों का पानी भी बहकर पाकिस्तान में चला जाता है. गडकरी ने अपने ट्वीट में पूर्वी नदियों के बचे हुए पानी को डायवर्ट कर जम्मू-कश्मीर और पंजाब को देने की जानकारी दी है. गौरतलब है कि पुलवामा हमले से दो महीने पहले यानी कि 6 दिसंबर, 2018 को कैबिनेट द्वारा बांध को मंजूरी दी गई थी. जिसे 2022-23 के वित्तीय वर्ष में पूरा होने की उम्मीद है.