प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना की सच्चाई: पति-पत्नी दोनों की मौत होने पर परिजनों को नहीं मिलेगी पेंशन की राशि
नई पेंशन स्कीम के तहत कहा गया है कि पति-पत्नी की मौत के बाद पैसा सरकार के खाते में वापस चला जाएगा.
प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (नई पेंशन स्कीम) के तहत एक नोटिफिकेशन जारी करने के बाद केंद्र की मोदी सरकार सवालों के घेरे में आ गई है. इसमें कहा गया है कि अगर स्कीम से जुड़े ग्राहकों में से पति-पत्नी दोनों की मौत हो जाती है तो पेंशन फंड का पैसा उनके बच्चों या परिवार के अन्य सदस्यों को नहीं मिलेगा और सरकार के खाते में वापस चला जाएगा.
हालांकि, अब तक पति-पत्नी की मौत के बाद अविवाहित बच्चों को पेंशन फंड की राशि दी जाती है. जनसत्ता की ख़बर के अनुसार प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना का यह नोटिफिकेशन अंतरिम बजट के दौरान जारी किया गया था.
सरकार के इस नोटिफिकेशन को लेकर एक अर्थशास्त्री का कहना है कि न्यू पेंशन स्कीम में पति-पत्नी की मौत के बाद पेंशन फंड का पैसा उनके बच्चों को दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि पेंशन योजना के लिए गरीब आदमी अपने खर्च में कटौती करके पैसे जमा करता है. सरकार को उनकी मौत के बाद उनके हिस्से का पैसा नहीं खाना चाहिए.
ज्ञात हो कि इस योजना के तहत पेंशन के हकदार व्यक्ति को 60 साल की उम्र पार करने पर 3000 रुपये प्रति माह पेंशन दिया जाएगा. सरकार के अनुसार इस पेंशन का पात्र वहीं शख्स होगा, जिसकी उम्र 18 से 29 वर्ष के बीच होगी और वह हर महीने 15 हज़ार से कम रुपए कमाता हो. जैसे-जैसे उम्र बढ़ेगी पेंशन स्कीम के ग्राहक का प्रीमियम भी बढ़ता जाएगा.
उदाहरण के तौर पर 18 साल के व्यक्ति को 55 रुपये देने होंगे, वहीं 29 साल के व्यक्ति को 100 रुपये हर महीने प्रीमियम के तौर पर 60 साल की उम्र तक भरना होगा.
ग़ौरतलब है कि इस पेंशन स्कीम का उद्देश्य कामगार, रेहड़ी-पटरी दुकानदार और निर्माण कार्यों में लगे तमाम मजदूरों को बुढ़ापे में आर्थिक सहारा देना है. ट्रेड यूनियन सरकार के इस नोटिफिकेशन के ख़िलाफ़ हैं. उनका कहना है कि सरकार मजदूरों की कमाई हड़पने की कोशिश कर रही है, जबकि उनकी कमाई के हकदार उनके परिवार जन हैं.
हालांकि, देखना होगा कि मोदी सरकार के इस नोटिफिकेशन को लेकर पेंशन स्कीम ग्राहकों का अगला कदम क्या होगा.