पुलवामा आतंकी हमला: CRPF जवानों ने की थी हवाई रास्ते से ले चलने की मांग, गृह मंत्रालय से नहीं मिला कोई जवाब
हमले से 6 दिनों पहले ही इंटेलिजेंस के पास IED के इस्तेमाल किए जाने के इनपुट थे.
पुलवामा हमले को लेकर एक नई जानकारी सामने आ रही है. CRPF के ही एक जवान का कहना है कि सरकार से जवानों को हवाई रास्ते से ले जाने को कहा गया था, मगर गृह मंत्रालय की ओर से इसे अनदेखा कर दिया गया था.
CRPF जवान के मुताबिक-“घाटी में अपनी सुरक्षा को लेकर हम सतर्क रहते हैं. जम्मू-कश्मीर में यात्रा करने के दौरान बहुत अधिक जोखिम रहता है. CRPF जवानों को हवाई रास्ते से या बुलेटप्रूफ बसों में क्यों नहीं ले जाया गया ?”
क्विंट की रिपोर्ट के मुताबिक इस हफ़्ते के शुरू में ही गृह मंत्रालय से, CRPF ने जवानों के लिए एयर ट्रांजिट की मांग की थी. मगर इसे अनदेखा कर दिया गया था.
CRPF के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक “बर्फबारी की वजह से रोड ब्लाक होने के कारण जम्मू में बहुत सारे जवान फंसे रह गए थे. इससे पहले 4 फरवरी को जवानों का पिछला काफिला निकला था. इसे देखते हुए हमने अपने CRPF मुख्यालय को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि हमें हवाई रस्ते से जवानों को ले जाने की सुविधा प्रदान की जाए. लेकिन कुछ नहीं हुआ. किसी ने हमें जवाब देने की भी जहमत नहीं उठाई.”
श्रीनगर में तैनात इस वरिष्ठ अधिकारी के CRPF मुख्यालय को पत्र लिखने के बाद, प्रक्रिया के मुताबिक इस अनुरोध को गृह मंत्रालय तक पहुंचा दिया गया. उनके मुताबिक इससे पहले भी जवानों को हवाई रास्ते से भेजने का अनुरोध कई बार किया जा चुका है मगर कभी भी स्वीकारा नहीं गया है.
“जवानों को हवाई रस्ते से ले जाना न केवल सुरक्षित होता है, बल्कि इसमें पैसे और समय की भी बचत होती है.”
हमले से 6 दिनों पहले ही इंटेलिजेंस के पास IED के इस्तेमाल किए जाने के इनपुट थे.
ख़ुफ़िया विभाग द्वारा 8 फरवरी को CRPF के शीर्ष अधिकारियों को एक पत्र लिखकर कहा गया था कि, “कृपया इलाके को अच्छे से साफ करें, क्योंकि घाटी में IED के इस्तेमाल के इनपुट हैं.“
रिटायर्ड IGP विपीएस पंवार ने इसे सुरक्षा में चूक का मामला बताया. उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि शीर्ष अधिकारियों की ओर से ख़ुफ़िया विभाग की रिपोर्ट पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. अपनी बात में उन्होंने आगे कहा कि आम तौर पर एक काफिले में 300-400 से ज्यादा जवान शामिल नहीं होते हैं और काफिले की आवाजाही के दिन भी पहले से तय हो जाते हैं,
पंवार के मुताबिक, “एक काफिले में 78 वाहनों को ले जाना, आतंकवादियों के लिए बैठी चिड़िया को पकड़ने जैसा था. मुझे लगता है कि एक साथ इतने सारे जवानों को ले जाना एक सही निर्णय नहीं था.”
उन्होंने हैरानी जताई कि लगभग 200 किलोग्राम विस्फोटक ले कर कोई वाहन, काफिले तक पहुंच कैसे गया.
ग़ौरतलब है कि बीते गुरूवार 14 फ़रवरी को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले में CRPF के 40 से ज्यादा जवान मारे गए थे, जबकि कई अन्य घायल हो गए थे. इतने बड़े काफ़िले को एक साथ सड़क से ले जाने पर कई लोगों ने सवाल खड़े किए थे. राज्यपाल सत्यपाल मलिक का भी कहना था कि सुरक्षा में चूक हुई है.