कोयला घोटाले में दाख़िल चार्जशीट में अडाणी पर CBI मेहरबान
रिपोर्ट में इस बात का ज़िक्र है कि अडाणी समूह का प्रमुख गौतम अडाणी एक उद्योगपति हैं जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी के करीबी माना जाता है.
कोयला घोटाला के एक मामले में दाखिल चार्जशीट में सीबीआई ने जहां कई कपंनियों को आरोपी बनाया है तो वहीं अडाणी समूह की कंपनियों को आरोपमुक्त कर दिया है. जबकि आरोपपत्र में जिन कंपनियों पर गैरक़ानूनी तरीके से काम करने का आरोप लगाया गया है, उन कंपनियों का काम करने का तरीका अडाणी समूह के कंपनियों से मिलता-जुलता है.
यानी जो आरोप सीबीआई ने इन कंपनियों पर लगाए हैं वे ही आरोप एक संयुक्त उद्यम अडाणी एंटरप्राइज लिमिटेड पर भी लग सकते हैं.
कारवां ने इसको लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट की है. इसमें बताया गया है कि बहुचर्चित कोलगेट घोटाले में सीबीआई ने राज्य अधिकृत कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानि केपीसीएल, इसके प्राइवेट पार्टनर ईएमटीए और उनके संयुक्त उद्यम कर्नाटका ईएमटीए कोल माइन्स लिमिटेड पर अनियमितता के आरोप लगाए हैं. ये अनियमितता कथित तौर महाराष्ट्र में छह कोल खंडों के आवंटन में बरती गई थी.
सीबीआई ने अपने आरोप पत्र में यह बताया कि ये तीन कंपनियां आवंटन के नियम का उल्लंघन करती पाई गईं. ये तीनों अच्छे कोयले को खराब बताकर उसे प्राइवेट कंपनियों को बेचने जैसे गोरखधंधे में शामिल थे.
कारवां की रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि केपीसीएल और अडाणी समूह की आरआरवीयूएनएल संयुक्त उपक्रमों के काम करने के तौर-तरीकों में जबरदस्त समानता नज़र आती है. अडाणी समूह की संयुक्त कंपनियों को जांच के घेरे में लाने की सीबीआई की सफ़लता संदेहास्पद है.
रिपोर्ट में इस बात का ज़िक्र है कि अडाणी समूह का प्रमुख गौतम अडाणी एक उद्योगपति हैं जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी के करीबी माना जाता है.
कारवां ने रिपोर्ट में यह दावा किया है कि दोनों मामलों में जांच एजेंसी का अलग रवैया रहा है. जो इस आलोचना को बल देता है कि कोयला घोटाले की जांच में सीबीआई पक्षपाती रही है.